जिस मिसाइल ने पाकिस्तान में मचाई थी तबाही, उसे खरीदने के लिए लाइन में खड़े हैं ये 14 देश, जानें पूरी जानकारी

Brahmos Missile: एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों से हथियार खरीदने पर काफी निर्भर था. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों के चलते भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

India used to buy weapons now the world wants to buy Indian missiles demand for BrahMos has surged
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Brahmos Missile: एक समय था जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों से हथियार खरीदने पर काफी निर्भर था. लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसे अभियानों के चलते भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है. आज भारतीय हथियार और रक्षा उपकरण दुनिया के कई देशों की पसंद बनते जा रहे हैं.

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 63 प्रतिशत अधिक है. इससे साफ है कि दुनिया में भारतीय रक्षा तकनीक पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है.

ब्रह्मोस मिसाइल की दुनिया भर में बढ़ी मांग

भारत की सबसे चर्चित मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में है. इसकी तेज रफ्तार और सटीक निशाने की क्षमता ने कई देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. जानकारी के मुताबिक, करीब 14 देशों ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है. 

भारत पहले ही फिलीपींस को ब्रह्मोस की आपूर्ति के लिए बड़ा समझौता कर चुका है. इसके बाद वियतनाम ने भी भारत के साथ अरबों रुपये की डील की है. अब इंडोनेशिया भी इस मिसाइल को अपनी सैन्य ताकत का हिस्सा बनाने की तैयारी कर रहा है.

खाड़ी देशों की भी नजर ब्रह्मोस पर

रिपोर्ट्स के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए भारत के रक्षा सिस्टम में दिलचस्पी दिखा रहा है. बताया जा रहा है कि यूएई ब्रह्मोस और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के विकल्प पर विचार कर रहा है.

इसके अलावा थाईलैंड, मलेशिया, ओमान, सऊदी अरब, मिस्र, चिली और ब्राजील जैसे कई देश भी भारतीय मिसाइल सिस्टम में रुचि दिखा रहे हैं. हालांकि कई मामलों में बातचीत अभी शुरुआती चरण में है.

आखिर ब्रह्मोस में क्या है खास?

ब्रह्मोस मिसाइल का विकास भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के सहयोग से किया गया है. इसे दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिना जाता है.

यह मिसाइल लगभग 2.8 से 3 मैक की रफ्तार से उड़ सकती है, यानी इसकी गति करीब 3700 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इतनी तेज गति के कारण दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है.

ब्रह्मोस की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुउपयोगी क्षमता है. इसे जमीन से, युद्धपोत से, लड़ाकू विमान से और पनडुब्बी से भी लॉन्च किया जा सकता है. यही वजह है कि यह आधुनिक युद्ध में बेहद प्रभावी हथियार माना जाता है.

रक्षा निर्यात में नई ऊंचाइयों की ओर भारत

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है. स्वदेशी तकनीक और आधुनिक हथियारों के दम पर देश अब केवल अपनी सुरक्षा मजबूत नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी मजबूत पहचान बना रहा है. ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है.

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