राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव को अब केंद्र सरकार से Y-Plus कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की गई है. यह सुरक्षा विशेष रूप से उन्हें गृह मंत्रालय के आदेश पर सीआरपीएफ (CRPF) द्वारा दी जा रही है. तेज प्रताप यादव को यह सुरक्षा वीआईपी प्रोटेक्शन लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद मिली है, और इसे उनकी सुरक्षा को लेकर हाल ही में दी गई रिपोर्ट के आधार पर मंजूरी दी गई है.
केंद्र सरकार से मिली सुरक्षा के बाद तेज प्रताप यादव का बयान
तेज प्रताप यादव ने हाल ही में निर्वाचन आयोग का दौरा किया था और वहां अपने बयान में कहा कि यह मामला श्याम किशोर चौधरी से जुड़ा हुआ है. श्याम किशोर को पार्टी का सिंबल दिया गया था, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति के महागठबंधन और वीआईपी अध्यक्ष मुकेश सहनी से समर्थन प्राप्त किया था. इसके विरोध में तेज प्रताप यादव निर्वाचन आयोग पहुंचे थे और श्याम किशोर का नामांकन रद्द करने की मांग की थी. सुरक्षा के बारे में बात करते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा, "बिहार में हालात ऐसे हैं कि कब और कहां से हमला हो सकता है, इस बारे में कुछ भी कहा नहीं जा सकता. इसलिए मैंने केंद्र सरकार से अपनी सुरक्षा बढ़ाने की अपील की थी."\
Y-Plus सुरक्षा प्रणाली: किसे मिलती है और कैसे काम करती है?
Y-Plus सुरक्षा एक उच्च सुरक्षा श्रेणी है, जो आमतौर पर ऐसे व्यक्तियों को दी जाती है, जिनकी जान को खतरा होता है और जो विशेष राजनीतिक या सामाजिक स्थिति में होते हैं. इस सुरक्षा पैकेज में 11 कमांडो तैनात होते हैं, जिनमें से 5 स्टेटिक जवान वीआईपी के घर और आसपास रहते हैं, जबकि 6 पीएसओ (Personal Security Officers) तीन शिफ्टों में उनकी सुरक्षा करते हैं. यह सुरक्षा व्यवस्था खासतौर पर उन नेताओं और उच्च पदाधिकारियों के लिए होती है, जिनकी सार्वजनिक गतिविधियाँ और प्रभावी राजनीति उन्हें असुरक्षित बना सकती है.
तेज प्रताप यादव की राजनीतिक योजनाएं
तेज प्रताप यादव इस समय बिहार की महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. पहले चरण का मतदान संपन्न हो चुका है, और अब उनकी रणनीति पर सभी की नजरें हैं. तेज प्रताप ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एक अहम बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी सरकार का समर्थन करेगी, जो रोजगार प्रदान करेगी, पलायन को रोकेगी, और बिहार में वास्तविक बदलाव लाएगी. इस बयान से यह स्पष्ट है कि उनकी प्राथमिकताएं बिहार के विकास और बेरोजगारी जैसी मुद्दों पर केंद्रित हैं.
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