ईरान के निशाने पर सऊदी-यूएई और बहरीन के शाही परिवार! ट्रंप का भी नाम शामिल, देखें मुज्तबा की हिट लिस्ट

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खाड़ी देशों पर भी दिखाई देने लगा है. अमेरिका के हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में बदले की आवाज तेज हो गई है.

Supreme Leader Mojtaba Saudi UAE and Bahraini royal families on Irans hit list
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खाड़ी देशों पर भी दिखाई देने लगा है. अमेरिका के हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में बदले की आवाज तेज हो गई है. अब तक ईरान की नाराजगी मुख्य रूप से अमेरिका और इजरायल को लेकर थी, लेकिन अब कुछ ईरानी नेताओं ने उन अरब देशों को भी निशाने पर लेने की बात कही है, जिनके सैन्य ठिकानों या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल अमेरिका ने किया.

ईरानी सांसद अमीरहोसैन साबेती ने सरकार से मांग की है कि अमेरिका का साथ देने वाले खाड़ी देशों के शासकों को भी संभावित निशाने की सूची में रखा जाए. इस बयान के बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन को लेकर चिंता बढ़ गई है.

तीन बड़े शाही परिवारों का जिक्र

ईरान में जिन परिवारों को लेकर बात हो रही है, उनमें सऊदी अरब का अल सऊद, यूएई का अल नाहयान और बहरीन का अल खलीफा शाही परिवार शामिल है.

ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई के दौरान अरब देशों की सुविधाओं का इस्तेमाल किया. ऐसे में ईरान के कुछ नेता मानते हैं कि सिर्फ अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है.

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ईरान की आधिकारिक नीति अब तक पड़ोसी देशों के खिलाफ सीधी लड़ाई से बचने की रही है. उसके प्रमुख निशाने अमेरिकी सैन्य ठिकाने और अमेरिकी हित रहे हैं. ऐसे में नेताओं की ओर से आई यह मांग नीति में संभावित बदलाव का संकेत मानी जा रही है.

सऊदी अरब में कौन-कौन बड़े नाम?

सऊदी अरब में अल सऊद परिवार का शासन है. किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद देश के राजा हैं. उनके बेटे मोहम्मद बिन सलमान प्रधानमंत्री हैं और देश की सरकार चलाने में उनकी बड़ी भूमिका है.

अगर ईरान की ओर से खाड़ी देशों की शीर्ष लीडरशिप को निशाना बनाने की बात आगे बढ़ती है, तो ये दोनों नाम सबसे अहम हो सकते हैं.

यूएई और बहरीन के शासक भी चर्चा में

संयुक्त अरब अमीरात सात अमीरातों का संघ है. यहां कई शाही परिवार सत्ता में हैं, लेकिन अबू धाबी का अल नाहयान परिवार सबसे प्रभावशाली माना जाता है. शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान यूएई के राष्ट्रपति हैं.

दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम देश के प्रधानमंत्री भी हैं. ईरान की ओर से खाड़ी देशों की लीडरशिप को लेकर दबाव बढ़ने की स्थिति में यूएई के ये शीर्ष नेता भी चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं.

बहरीन में अल खलीफा परिवार का शासन है. किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा देश के राजा हैं. उनके बेटे सलमान बिन हमद अल खलीफा क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री हैं.

ईरान अरब देशों पर दबाव क्यों बढ़ा रहा?

ईरान लंबे समय से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विरोध करता रहा है. उसका कहना है कि अमेरिका को अरब देशों में मौजूद सैन्य ठिकानों का फायदा मिल रहा है.

अब ईरान को डर है कि भविष्य में अमेरिका उसके खिलाफ कोई और सैन्य कार्रवाई कर सकता है. इसी वजह से वह खाड़ी देशों को भी चेतावनी दे रहा है कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में उनका सहयोग उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है.

ईरान की रणनीति का एक हिस्सा अरब देशों को अमेरिका से दूरी बनाने के लिए मजबूर करना भी हो सकता है. अगर खाड़ी देशों और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है तो पूरे क्षेत्र में एक बार फिर नए सैन्य समीकरण बन सकते हैं.

अमेरिकी गतिविधियों पर ईरान की नजर

ईरान अमेरिका की सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख ने हाल में खाड़ी क्षेत्र का दौरा किया है और कई देशों के सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है.

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन की गतिविधियां भी ईरान के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं. ईरान को आशंका है कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो खाड़ी क्षेत्र के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया जा सकता है.

यही वजह है कि ईरान अब अरब देशों को लेकर पहले से ज्यादा आक्रामक बयान दे रहा है.

कतर के साथ भी बढ़ा तनाव

ईरान और कतर के बीच एक अलग विवाद ने भी क्षेत्र की स्थिति को जटिल बना दिया है. ईरान का दावा है कि मार्च में हुई सैन्य कार्रवाई के बाद उसके तीन पायलट कतर की हिरासत में हैं.

ईरान के मुताबिक 2 मार्च को उसके दो सुखोई विमानों ने कतर के अल-उदैद एयरबेस पर हमला किया था. जवाबी कार्रवाई में कतर के एफ-15 विमानों ने ईरानी विमानों को निशाना बनाया. दोनों विमान फारस की खाड़ी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गए.

ईरान का कहना है कि चार पायलटों में से एक का शव बरामद किया गया, जबकि बाकी तीन पायलटों को कतर ने पकड़ लिया. हालांकि कतर ने इस दावे को साफ तौर पर खारिज किया है. कतर का कहना है कि उसकी हिरासत में कोई ईरानी पायलट नहीं है.

दूसरी तरफ बन रहा नया सैन्य समीकरण

खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बीच मुस्लिम देशों के बीच सैन्य सहयोग भी बढ़ता दिख रहा है. सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने 7 अगस्त को मक्का रक्षा समझौते के नाम से एक समझौता किया है.

इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला होने की स्थिति में उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और बाकी दोनों देश उसके साथ खड़े होंगे. इसकी तुलना नाटो के सामूहिक सुरक्षा वाले नियम से की जा रही है.

ऐसे समय में जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, खाड़ी देशों की भूमिका बेहद अहम हो गई है. ईरान की ओर से अरब देशों की लीडरशिप को लेकर दिए जा रहे बयान और दूसरी तरफ नए सैन्य गठजोड़ की कोशिशें पश्चिम एशिया में आने वाले दिनों के समीकरण को काफी प्रभावित कर सकती हैं.