नई दिल्ली: देश में साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. सरकारी वेबसाइटों से लेकर आम लोगों को ऑनलाइन सेवाएं देने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म तक साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में देश में 29,44,248 साइबर सुरक्षा घटनाएं रिपोर्ट की गईं और उन पर नजर रखी गई. यह संख्या 2023 में दर्ज 15,92,917 मामलों से करीब 85 फीसदी ज्यादा है.
हर साल तेजी से बढ़ रहे साइबर मामले
साइबर सुरक्षा घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल के पास 2023 में 15,92,917 मामले दर्ज हुए थे. इसके बाद 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 20,41,360 हो गया.
साल 2025 में मामलों की संख्या में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी हुई और यह 29,44,248 तक पहुंच गई. यानी दो साल के दौरान साइबर सुरक्षा से जुड़े मामलों में करीब 13.5 लाख की बढ़ोतरी हुई है. 2023 की तुलना में 2025 में रोजाना औसतन 8 हजार से ज्यादा अतिरिक्त मामले दर्ज किए गए.
लगातार बढ़ते ये आंकड़े अब देश की डिजिटल सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं.
सरकारी डिजिटल सिस्टम पर बढ़ा खतरा
सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करोड़ों लोगों से जुड़ी जानकारी और सेवाएं मौजूद हैं. आधार, कर, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी कई सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं.
ऐसे में इन सिस्टम पर साइबर हमला होने का असर सिर्फ किसी एक वेबसाइट तक सीमित नहीं रहता. अगर किसी बड़े सरकारी सिस्टम में सेंध लगती है तो बड़ी संख्या में लोगों का डेटा प्रभावित हो सकता है और जरूरी सेवाओं में भी रुकावट आ सकती है.
इसी वजह से सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म साइबर अपराधियों के लिए बड़े निशाने बनते जा रहे हैं. जारी आंकड़ों में अलग-अलग तरह की रिपोर्ट की गई और ट्रैक की गई साइबर सुरक्षा घटनाएं शामिल हैं.
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