रांची में छात्रों के आंदोलन के बीच CID का बड़ा एक्शन, JPSC के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते गिरफ्तार

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब JPSC परीक्षा को लेकर राज्य में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है.

student protests in Ranchi former JPSC Chairman L. Khiangte arrested by CID
Image Source: Social Media

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब JPSC परीक्षा को लेकर राज्य में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है.

एल. खियांगते पर आरोप है कि उन्होंने JPSC के चेयरमैन रहते हुए ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL को काम देने के बदले कथित रूप से रिश्वत ली थी. CID ने उन्हें गिरफ्तार करने से पहले कई बार लंबी पूछताछ की थी.

अभय तिवारी से पूछताछ के बाद कार्रवाई

CID के अनुसार, पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान कुछ अहम जानकारी मिली थी. उसी आधार पर जांच एजेंसी ने सोमवार को एल. खियांगते को गिरफ्तार किया.

एल. खियांगते 1988 बैच के झारखंड कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी रहे हैं. वह राज्य के मुख्य सचिव के पद पर भी काम कर चुके हैं.

जांच के दौरान दिया था इस्तीफा

कुछ समय पहले एल. खियांगते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपना इस्तीफा ई-मेल के जरिए राजभवन भेजा था.

उनका इस्तीफा उस समय आया था जब 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद चल रहा था. कई छात्रों ने रिजल्ट में गड़बड़ी का आरोप लगाया था और लगातार प्रदर्शन कर रहे थे.

CID कर रही है पूरे मामले की जांच

सरकार ने इस मामले की जांच CID को सौंपी है. जांच के दौरान JPSC कार्यालय में भी कार्रवाई की गई और अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ के साथ कई दस्तावेजों की जांच की जा रही है.

पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है. CID अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ियां कैसे हुईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी.

छात्र लंबे समय से परीक्षा में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

ये भी पढ़ें- FCRA Bill: 12 अगस्त को अमित शाह पेश कर सकते हैं FCRA बिल, परिसीमन पर क्या है मोदी सरकार की रणनीति?