Social Media Ban: यूरोप के कई देश अब यह मानने लगे हैं कि बच्चों की सुरक्षा केवल स्कूल और घर तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि ऑनलाइन दुनिया भी उतनी ही गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है. ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और डेनमार्क के बाद अब स्पेन और ग्रीस भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं.
युवाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का फैसला
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस योजना की घोषणा करते हुए साफ कहा कि सरकार का मकसद बच्चों और किशोरों को ऑनलाइन कंटेंट के नकारात्मक प्रभावों से बचाना है. उनका मानना है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग युवाओं के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है. इसी कारण सरकार अब सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है, ताकि आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित डिजिटल माहौल मिल सके.
शिखर सम्मेलन में उठी गंभीर चिंताएं
संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री सांचेज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद अवैध और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर चिंता जताई. उन्होंने बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और डीपफेक जैसी तकनीकों के दुरुपयोग को बेहद खतरनाक बताया. उनके अनुसार, ये प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए एक ऐसा जोखिम बन चुके हैं, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
सरकारों के लिए आंख मूंदना अब मुमकिन नहीं
स्पेन के प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारें अब इस समस्या से मुंह नहीं मोड़ सकतीं. यह केवल चेतावनी देने या दिशा-निर्देश जारी करने का समय नहीं है, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित प्रतिबंध महज कागजी औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि इसे सख्ती से लागू किया जाएगा.
आयु सत्यापन प्रणाली पर होगा जोर
इस योजना के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को मजबूर किया जाएगा कि वे मजबूत और प्रभावी आयु सत्यापन प्रणाली लागू करें. अब सिर्फ एक ‘चेक बॉक्स’ पर क्लिक कर उम्र की पुष्टि करने का तरीका स्वीकार्य नहीं होगा. कंपनियों को ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी, जिससे वास्तव में यह सुनिश्चित किया जा सके कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल न कर सकें.
मौजूदा नियमों की कमजोरियां उजागर
वर्तमान समय में अधिकतर सोशल मीडिया ऐप्स पर 13 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा तय है, लेकिन हकीकत यह है कि बच्चे आसानी से गलत उम्र दर्ज कर अकाउंट बना लेते हैं. यही वजह है कि नियम होने के बावजूद उनका प्रभाव जमीन पर नजर नहीं आता. स्पेन और ग्रीस का यह प्रस्ताव इन्हीं कमजोरियों को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
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