भारत और रूस के बीच और मजबूत होगा व्यापार, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक तक स्पेशल ट्रेड रूट बनाने की तैयारी

Chennai-Vladivostok Corridor: भारत और रूस के बीच व्यापार को तेज और आसान बनाने के उद्देश्य से चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग विकसित किया जा रहा है. इस प्रस्तावित रूट के जरिए भारत के दक्षिणी बंदरगाह चेन्नई को रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक से जोड़ा जाएगा.

Trade between India and Russia will become stronger special trade route till Chennai-Vladivostok
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Chennai-Vladivostok Corridor: भारत और रूस के बीच व्यापार को तेज और आसान बनाने के उद्देश्य से चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग विकसित किया जा रहा है. इस प्रस्तावित रूट के जरिए भारत के दक्षिणी बंदरगाह चेन्नई को रूस के सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक से जोड़ा जाएगा. इसके शुरू होने से दोनों देशों के बीच माल ढुलाई में लगने वाला समय काफी कम होने की उम्मीद है.

मौजूदा समुद्री मार्गों से भारत से रूस तक सामान पहुंचने में करीब 40 दिन या उससे अधिक समय लग जाता है. नए कॉरिडोर के जरिए यह अवधि घटकर लगभग 24 दिन रह सकती है. समय में इस कमी से कंपनियों को तेज सप्लाई चेन का फायदा मिलेगा और माल लंबे समय तक गोदामों में रुके बिना जल्दी डेस्टिनेशन तक पहुंच सकेगा, जिससे स्टोरेज लागत भी कम होगी.

कब तक शुरू हो सकता है नया रूट?

चेन्नई में रूस के काउंसल जनरल वैलेरी खोडझाएव के अनुसार यह समुद्री मार्ग रणनीतिक रूप से अहम है और इसे चालू करने की दिशा में काम जारी है. उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाएं समय लेती हैं, लेकिन इसे लागू करना दोनों देशों के हित में है. रूस का लक्ष्य भारत के साथ व्यापारिक संतुलन को मजबूत करना है, जिसमें दक्षिण भारत की भूमिका अहम मानी जा रही है.

दक्षिण भारत की औद्योगिक क्षमता बनेगी आधार

दक्षिण भारत के राज्यों में इंजीनियरिंग, फार्मा, प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों का मजबूत नेटवर्क है. ऐसे में चेन्नई से शुरू होने वाला यह पोर्ट-टू-पोर्ट रूट लॉजिस्टिक्स कंपनियों और निर्यातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. जब दोनों देशों के बीच लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट और नियमित कार्गो मूवमेंट तय होंगे, तब इस कॉरिडोर को चलाना और ज्यादा व्यावहारिक हो जाएगा.

व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा

इस नए समुद्री रास्ते से पारंपरिक और व्यस्त रूट्स पर निर्भरता कम हो सकती है. कम दूरी और कम समय की वजह से ट्रांसपोर्ट लागत पर नियंत्रण रखना आसान होगा. इससे बिजनेस-टू-बिजनेस सौदों में समय पर डिलीवरी और कीमतों में स्थिरता बनाए रखना संभव होगा.

सफल संचालन के लिए क्या जरूरी होगा?

इस कॉरिडोर को प्रभावी बनाने के लिए जहाजों का नियमित संचालन, तय शेड्यूल के अनुसार आवाजाही और वापसी में भी माल की उपलब्धता अहम होगी. अगर यह मार्ग स्थायी रूप से शुरू होता है, तो यह भारत–रूस व्यापार को नई गति देने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स से जुड़े जोखिमों को भी कम कर सकता है.

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