Yumnam Khemchand Oath: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा. इसके साथ ही राज्य में संवैधानिक रूप से चुनी हुई सरकार की वापसी हो गई है.
राष्ट्रपति शासन हटते ही युमनाम खेमचंद ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया. राज्यपाल अजय भल्ला ने लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई.
#WATCH | Imphal: BJP Manipur Legislature Party leader Yumnam Khemchand Singh takes oath as the Chief Minister of Manipur
— ANI (@ANI) February 4, 2026
Governor of Manipur Ajay Bhalla administers the oath at the Lok Bhavan. pic.twitter.com/Ri1Et4J0Oa
कौन हैं नए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद?
62 वर्षीय युमनाम खेमचंद मेतेई समुदाय से आते हैं और सिंगजामेई विधानसभा सीट से विधायक हैं. पेशे से इंजीनियर रहे खेमचंद इससे पहले बीरेन सिंह सरकार में नगर प्रशासन और आवास विभाग के मंत्री रह चुके हैं. राजनीति में उनकी पहचान एक अनुभवी संगठनकर्ता के तौर पर रही है. वर्ष 2022 में भी उनका नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल था. पार्टी के भीतर उन्हें आरएसएस के करीबी नेताओं में गिना जाता है, जिससे संगठनात्मक स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है.
विधायक दल की बैठक में लगी मुहर
बीजेपी विधायक दल की बैठक मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में आयोजित की गई थी. इस बैठक के लिए पार्टी आलाकमान की ओर से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था. लंबी चर्चा और मंथन के बाद खेमचंद को विधायक दल का नेता चुना गया. मुख्यमंत्री पद की रेस में गोविंद दास और टी. विश्वजीत सिंह के नाम भी प्रमुखता से सामने आए थे. गोविंद दास सात बार के विधायक हैं और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह का समर्थन भी प्राप्त बताया जा रहा था.
इंफाल की जगह दिल्ली में क्यों हुई बैठक?
शुरुआत में विधायक दल की बैठक इंफाल में होनी थी, लेकिन कुकी समुदाय से जुड़े कुछ विधायकों ने दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात की इच्छा जताई. इसी वजह से बैठक का स्थान बदला गया. इस दौरान राज्य में राजनीतिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संतुलन को लेकर भी चर्चा हुई. अंततः पार्टी नेतृत्व ने सर्वसम्मति से खेमचंद के नाम पर मुहर लगाई.
जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि में बदला नेतृत्व
मणिपुर पिछले कुछ समय से गंभीर जातीय तनाव का सामना कर रहा है. मई 2023 में मेतेई और कुकी समुदायों के बीच भड़की हिंसा ने राज्य को गहरे संकट में डाल दिया था. इन झड़पों में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए. हालात बिगड़ने के बाद 13 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया.
विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन की स्थिति
मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास फिलहाल 37 विधायक हैं. एनडीए के सहयोगी दलों में एनपीपी के 6 और नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के 5 विधायक शामिल हैं. इस तरह सत्ताधारी गठबंधन के पास बहुमत का समर्थन मौजूद है. पहली बार 13 फरवरी 2025 को छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था, जिसे अगस्त 2025 में आगे के छह महीनों के लिए बढ़ा दिया गया था.
नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां
राष्ट्रपति शासन खत्म होने और नई सरकार के गठन के बाद लोगों को स्थिरता की उम्मीद है. हालांकि मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं. राज्य में शांति बहाल करना, विस्थापित लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करना और मेतेई-कुकी समुदायों के बीच भरोसा कायम करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल होगा. इसके साथ ही प्रशासनिक सुधार और विकास योजनाओं को दोबारा गति देना भी नई सरकार के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है.
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