Share Market Crash: गुरुवार सुबह शेयर बाजार खुलते ही निवेशकों को बड़ा झटका लगा. महज कुछ ही मिनटों में बाजार में इतनी तेज गिरावट आई कि करीब 8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई. अचानक आई इस गिरावट से पूरे बाजार में डर का माहौल बन गया और निवेशकों में हड़कंप मच गया.
दरअसल, इस भारी गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय हालात जिम्मेदार हैं. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है.
Brent Crude 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई. तेल की कीमतों में तेजी का मतलब महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ना है, इसलिए निवेशकों ने तेजी से बिकवाली शुरू कर दी.
सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट
गिरावट के दौरान बाजार के प्रमुख सूचकांक बुरी तरह टूट गए. BSE Sensex करीब 1800 अंक गिरकर 74,869 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 532 अंक टूटकर 23,238 के आसपास कारोबार करता नजर आया.
यह गिरावट इसलिए भी ज्यादा चौंकाने वाली रही क्योंकि एक दिन पहले ही बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली थी.
हर सेक्टर में बिकवाली का दबाव
इस बार गिरावट सिर्फ कुछ शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे बाजार में बिकवाली देखी गई. बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ.
HDFC Bank, Axis Bank और Larsen & Toubro जैसे बड़े शेयर भी तेज गिरावट के साथ ट्रेड करते दिखे. सेंसेक्स के ज्यादातर शेयर लाल निशान में रहे, जिससे बाजार में घबराहट साफ नजर आई.
मिडकैप और स्मॉलकैप भी गिरे
बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली. बाजार में ट्रेड हो रहे ज्यादातर शेयर नुकसान में रहे और कई शेयर अपने एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गए.
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अभी कुछ समय तक बाजार पर बना रह सकता है. ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.
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