गाजा सिटी, एक बार फिर जंग का मैदान बन गया है. शहर के उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व इलाकों से इजरायली सेना ने जबरदस्त हमला तेज कर दिया है, जिससे चारों ओर दहशत का माहौल है. टैंकों, मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच शहर की गलियां चीखों और भगदड़ से भर गई हैं. इजरायल का दावा है कि गाजा सिटी हमास का मुख्य गढ़ है और जब तक इसे पूरी तरह नष्ट नहीं किया जाता, ऑपरेशन जारी रहेगा.
सूत्रों के मुताबिक, इजरायली सेना ने गाजा सिटी को चारों ओर से घेर लिया है. शहर की सीमा पर बख्तरबंद वाहन और हथियारों से लैस सैनिक तैनात हैं. लोग घबराकर अल-राशिद कोस्टल रोड की ओर भागने की कोशिश कर रहे हैं, जो गाजा के दक्षिणी हिस्से तक जाती है. लेकिन यह रास्ता भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. यहां की भीड़-भाड़ और घनी आबादी की वजह से हालात और बदतर हो गए हैं. हर दिशा से हो रहे हमलों के कारण लोग सुरक्षित स्थान की तलाश में भाग रहे हैं, लेकिन कोई गारंटी नहीं कि कौन-सी दिशा सुरक्षित है.
गुरुवार का हमला: 40 से अधिक मौतें, घर छोड़ने को तैयार नहीं लोग
गुरुवार को हुए एक तीव्र हवाई हमले में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई. लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी अपने घरों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं. गाजा के उत्तरी हिस्से में आज भी लगभग 35% आबादी रुकी हुई है, जिनके पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं है या फिर वे अपनी ज़मीन छोड़ने को राज़ी नहीं.
अमेरिका ने फिर किया संघर्षविराम प्रस्ताव का विरोध
गाजा में जमीनी स्थिति चाहे जितनी भी गंभीर हो, वैश्विक मंच पर राजनीति ने एक और मोड़ ले लिया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गुरुवार को पेश किए गए स्थायी संघर्षविराम प्रस्ताव को अमेरिका ने वीटो कर दिया. प्रस्ताव में न केवल युद्ध रोकने की अपील की गई थी, बल्कि इजरायल से 21 लाख फलस्तीनी नागरिकों को मानवीय सहायता पहुंचाने की अनुमति देने की मांग भी की गई थी. इस प्रस्ताव के समर्थन में 14 सदस्य देशों ने वोट दिया, लेकिन अमेरिका के वीटो ने इसे रोक दिया. इस कदम से अमेरिका और इजरायल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और ज्यादा अलग-थलग होते देखा जा रहा है.
मानवीय संकट गहराया, समाधान की कोई स्पष्ट राह नहीं
गाजा की ज़मीन पर हर दिन मानवीय त्रासदी गहराती जा रही है. हजारों लोग बेघर हो चुके हैं, स्कूल और अस्पताल तबाह हो चुके हैं और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई दहशत और भूख में जी रहा है. वहीं दूसरी तरफ, राजनैतिक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंचों पर लगातार गतिरोध बना हुआ है. अमेरिका का इजरायल के प्रति समर्थन और संघर्षविराम पर अड़ियल रुख, शांति के रास्ते को और कठिन बना रहा है.
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