क्या इस शहर के बदले खत्म होगी जंग? पुतिन के नए प्रस्ताव से यूक्रेन में हलचल, ट्रंप की चुप्पी पर उठे सवाल

Russia Ukraine Peace Deal: रूस और यूक्रेन के बीच करीब तीन साल से जारी युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां एक छोटा सा समझौता बड़ा भूचाल ला सकता है, राजनीतिक भी और कूटनीतिक भी.

Putin new proposal stirs up tensions in Ukraine raising questions about Trump silence
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Russia Ukraine Peace Deal: रूस और यूक्रेन के बीच करीब तीन साल से जारी युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां एक छोटा सा समझौता बड़ा भूचाल ला सकता है, राजनीतिक भी और कूटनीतिक भी. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत में एक अहम प्रस्ताव रखा है. पुतिन ने कहा है कि अगर उन्हें यूक्रेन के डोनेत्स्क क्षेत्र पर "पूर्ण नियंत्रण" मिल जाए, तो वह ज़ापोरिज़झिया और खेरसॉन जैसे विवादित क्षेत्रों के कुछ हिस्सों से पीछे हट सकते हैं.

यह प्रस्ताव सिर्फ एक 'डील' नहीं, बल्कि एक ऐसे युद्ध का संभावित अंत भी हो सकता है, जिसने यूरोप की सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और लाखों आम लोगों की ज़िंदगी को प्रभावित किया है.

"डोनेत्स्क दो, बाकी छोड़ दूंगा"

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत में पुतिन ने अपनी मंशा स्पष्ट की, अगर डोनेत्स्क पर उनका दावा मान लिया जाए, तो रूस यूक्रेन के कुछ और हिस्सों से पीछे हटने पर विचार कर सकता है. यानी, रूस सीमित जीत के साथ युद्ध से बाहर निकलना चाहता है, लेकिन कीमत यूक्रेन की ज़मीन होगी.

यह वही डोनेत्स्क है, जो पूर्वी यूक्रेन का एक सामरिक और प्रतीकात्मक रूप से अहम हिस्सा है. यह वही क्षेत्र है जिसे पुतिन 2014 से नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, और जहां यूक्रेनी सेना ने अब तक ज़बरदस्त मोर्चाबंदी की हुई है.

ट्रंप की ‘डील पॉलिटिक्स’

डोनाल्ड ट्रंप ने इस कॉल पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन उनके करीबी सूत्रों ने इसे “शांति की दिशा में पहला कदम” बताया. बाद में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक कूटनीतिक लाइन लिखी, “अब समय आ गया है कि खून-खराबा रोका जाए और एक समझौता किया जाए! दोनों पक्ष खुद को विजेता मानें, फैसला इतिहास पर छोड़ दें!”

यह बयान सुनने में संतुलित लग सकता है, लेकिन यूक्रेनी नेतृत्व इसे एक कड़वी गोली की तरह देख रहा है. क्योंकि ट्रंप का यह रुख मानो उन्हें कह रहा हो कि ‘जहां हो, वहीं रुक जाओ’, जबकि यूक्रेन हर इंच ज़मीन वापस लेने के संकल्प पर कायम है.

“अपना ही हिस्सा बेचने जैसा सौदा”

यूरोपीय राजनयिकों ने पुतिन के प्रस्ताव को सख्ती से खारिज किया है. उनका कहना है कि यह एक तरह से यूक्रेन की संप्रभुता को नीलाम करने जैसा है. दरअसल, यूरोप समझता है कि अगर आज डोनेत्स्क दिया गया, तो कल खारकीव और परसों कीव भी मांग ली जाएगी.

‘हंगरी समिट’ में अगला फेस-ऑफ

ट्रंप और पुतिन की अगली मुलाकात हंगरी में प्रस्तावित है, जहां इस युद्ध को रोकने को लेकर आगे की बातचीत होनी है. अमेरिका की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस वार्ता की तैयारी में जुटे हैं. यूक्रेन ने ट्रंप की सीज़फायर अपील का स्वागत तो किया है, लेकिन साफ कहा है कि "रूस के कब्जे वाले किसी भी हिस्से को मान्यता नहीं दी जा सकती."

यूक्रेन को डर है रूस के अगले हमले का

इस बार की सर्दी यूक्रेन के लिए फिर से एक बड़ी परीक्षा हो सकती है. रिपोर्ट्स हैं कि रूस एक बार फिर यूक्रेनी शहरों की ऊर्जा संरचना को निशाना बना सकता है, बिजली, हीटिंग और मूलभूत सुविधाएं बंद कर के आम नागरिकों को ठंड से जूझने पर मजबूर किया जा सकता है. इसलिए राष्ट्रपति जेलेंस्की अब अमेरिका और यूरोपीय देशों से सुरक्षा आश्वासन मांग रहे हैं.

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