Putin India Visit: दिल्ली इन दिनों बेहद सक्रिय है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा ने राजधानी के राजनीतिक गलियारों में नया उत्साह और तेज़ी भर दी है. यह दौरा केवल एक सामान्य राजकीय यात्रा नहीं, बल्कि भारत–रूस संबंधों को अगले दशक की दिशा देने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है. ऊर्जा से लेकर रक्षा सहयोग, व्यापार से लेकर कूटनीतिक विस्तार हर मोर्चे पर बड़े फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है.
पुतिन साल 2000 में पहली बार भारत आए थे और तब से अब तक कई बार दोनों देश शिखर सम्मेलन में मिलते रहे हैं. लेकिन इस बार हालात और गतिशीलता बिल्कुल अलग हैं. पिछले कुछ वर्षों में रूस भारत का बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है. विशेषकर कच्चे तेल, गैस, उर्वरक और ऊर्जा क्षेत्र में. दूसरी ओर, भारत चाह रहा है कि मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के ज़रिये भारतीय उत्पादों के लिए रूसी बाज़ार में बेहतर अवसर मिलें. इसी के साथ दिल्ली में होने वाला ‘इंडिया-रशिया बिज़नेस फोरम’ इस यात्रा का केंद्रीय आकर्षण होगा, जहां दोनों देशों की कंपनियों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारियों की घोषणा संभव है.
कज़ान और येकातेरिनबर्ग में भारत के नए दूतावास
भारत अपनी कूटनीतिक मौजूदगी को रूस में मजबूत करने जा रहा है. कज़ान और येकातेरिनबर्ग दो अहम रूसी शहर जल्द ही भारतीय वाणिज्य दूतावासों की नई लोकेशन बनेंगे. इससे रूस में रहने, पढ़ने या काम करने वाले भारतीयों और भारतीय कंपनियों को बड़ी सुविधा मिलने वाली है. रक्षा सहयोग भी यात्रा का बड़ा हिस्सा रहेगा. खास तौर पर Su-57 जैसे उन्नत लड़ाकू विमान प्लेटफॉर्म पर बातचीत को लेकर काफी उत्सुकता है. भारत और रूस के बीच तकनीकी और सामरिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के संकेत भी मिल रहे हैं.
युद्ध और कूटनीति पर भारतीय पक्ष साफ
विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि भारत ने रूस–यूक्रेन संघर्ष में कभी मध्यस्थ की भूमिका की पेशकश नहीं की है. हाल ही में यूरोपीय राजदूत द्वारा पुतिन की यात्रा पर लिखे गए लेख को भारत ने ‘अनुचित और अकूटनीतिक’ बताते हुए औपचारिक तौर पर आपत्ति भी दर्ज कराई है. विटकॉफ़ मामले पर भी पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तृत चर्चा कर सकते हैं. इसके अलावा यात्रा के दौरान Russia Today (RT) के भारत में आधिकारिक लॉन्च की भी संभावना जताई जा रही है.
भारतीय कामगारों के लिए रूस में नए अवसर
दोनों देशों के बीच ‘स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड वर्कर्स मोबिलिटी समझौते’ का प्रारूप तैयार है. रूस इस समय बड़ी संख्या में विदेशी कामगारों की मांग कर रहा है, ऐसे में भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुल सकते हैं. फिर भी विदेश मंत्रालय ने सलाह दी है कि कोई भी भारतीय नागरिक विदेश में नौकरी लेते समय किसी भी कॉन्ट्रैक्ट पर साइन करने से पहले शर्तों को ध्यान से पढ़ें. रूस की सेना में पहुंच गए लगभग सभी भारतीय कामगार वापस आ चुके हैं और बाकी को भी लाने की प्रक्रिया जारी है.
व्यापार और ऊर्जा में बढ़ती निकटता
भारत–रूस आर्थिक रिश्तों का वास्तविक केंद्र दो मुद्दे हैं.
(1) बढ़ता व्यापार घाटा कैसे कम किया जाए?
(2) ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा को दीर्घकालिक आधार पर कैसे सुनिश्चित किया जाए? रूस से मिलने वाला उर्वरक भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, और इस क्षेत्र में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है. ऊर्जा कारोबार भी पूरी तरह व्यावसायिक समझौतों के आधार पर चल रहा है, इसलिए भविष्य की दिशा वैश्विक प्रतिबंधों और बाज़ार परिस्थितियों पर निर्भर करेगी. रुपया–रूबल लेन-देन तंत्र पहले से लागू है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक भुगतान आसान और सुचारु हो गया है.
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