Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखने लगा है. इस तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में कई तेल और गैस से भरे जहाज फंस गए हैं. यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया के लगभग एक चौथाई तेल का समुद्री व्यापार गुजरता है. जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई देशों में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है.
भारत भी इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है. सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में तेल या गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी. साथ ही सरकार उन विकल्पों पर काम कर रही है, जिनके जरिए इस इलाके में फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.
होर्मुज में क्यों फंसे हैं जहाज
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण मिडिल ईस्ट में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. ईरान ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ने पर वह होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद भी कर सकता है. इसी वजह से कई तेल टैंकर आगे बढ़ने से बच रहे हैं और कुछ जहाज वहीं रुक गए हैं.
हालांकि ईरान की ओर से यह संकेत दिया गया है कि भारतीय जहाजों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, फिर भी सुरक्षा कारणों से जहाजों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
जहाजों को निकालने के लिए सरकार का प्लान
रिपोर्ट्स के मुताबिक शिपिंग विभाग के अधिकारी पी.सी. मीणा की अगुवाई में एक विशेष टीम स्थिति पर नजर रख रही है. अधिकारियों के अनुसार होर्मुज और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में मौजूद जहाजों के पास फिलहाल पर्याप्त भोजन और जरूरी सामान मौजूद है.
सरकार जिस विकल्प पर विचार कर रही है, उसमें भारतीय जहाजों को नौसेना की सुरक्षा में यानी एस्कॉर्ट करके सुरक्षित बाहर निकालने का प्लान शामिल है. हालांकि इस योजना पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
सरकार का भरोसा: तेल-गैस की कमी नहीं होगी
भारत सरकार का कहना है कि देश के पास वैकल्पिक सप्लाई रूट और पर्याप्त भंडार मौजूद हैं. इसलिए अगर होर्मुज मार्ग कुछ समय के लिए प्रभावित भी होता है, तब भी भारत में ईंधन संकट नहीं आने दिया जाएगा.
सरकार ने एक निगरानी तंत्र भी बनाया है, जिसमें हर तीन घंटे में स्थिति की रिपोर्ट ली जा रही है. इसमें जहाजों की लोकेशन, समुद्री हालात और नाविकों की सुरक्षा की जानकारी शामिल होती है.
जहाजों के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल
सरकार ने भारतीय जहाजों के लिए कड़े सुरक्षा नियम लागू किए हैं. ये नियम सिर्फ होर्मुज ही नहीं बल्कि ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी जैसे आसपास के समुद्री इलाकों में भी लागू हैं.
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग की एडवाइजरी के अनुसार सभी भारतीय जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के नियमों के तहत सुरक्षा ड्रिल करनी होगी. इसमें जहाज और नजदीकी पोर्ट के बीच लाइव कम्युनिकेशन, समुद्री डकैती या हमले जैसी संभावित स्थितियों की मॉक ड्रिल शामिल हैं.
कैप्टन को रोजाना ऑनलाइन फॉर्म भरकर जहाज से जुड़ी जानकारी भेजनी होगी, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना तुरंत मदद कर सके. अगर किसी जहाज पर खतरा महसूस होता है तो रेडियो के जरिए सीधे नौसेना से संपर्क किया जा सकता है.
अभी तक सुरक्षित हैं भारतीय जहाज
सरकार के अनुसार अभी तक किसी भी भारतीय जहाज पर हमला नहीं हुआ है और न ही किसी भारतीय नाविक को नुकसान पहुंचा है. भारत फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी कर रहा है.
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