Indian Ships: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच संघर्ष का असर समुद्री रास्तों पर भी दिखाई दे रहा है. होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में भारत के करीब 36 जहाज फंसे हुए हैं.
अब भारत सरकार इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है. एक संभावना यह भी है कि भारतीय नौ सेना के युद्धपोत इन जहाजों को एस्कॉर्ट करते हुए सुरक्षित रास्ते से बाहर निकालें.
फिलहाल सभी जहाज सुरक्षित
सरकारी जानकारी के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद सभी भारतीय जहाज अभी सुरक्षित हैं और उन्हें जरूरी सामान की कोई कमी नहीं है. हालांकि युद्ध जैसे हालात के कारण जहाजों को कड़े सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ रहा है और लगातार अधिकारियों के साथ स्थिति की जानकारी साझा की जा रही है.
नौसेना की तैनाती पर विचार
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय नौसेना के जहाज भेजे जा सकते हैं.
नौवहन क्षेत्र के सूत्रों का अनुमान है कि उस इलाके में मौजूद तेल टैंकर और गैस कैरियर जहाजों में लगभग 10 प्रतिशत भारतीय हैं. इनमें शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के जहाज भी शामिल हैं.
इसके अलावा दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में हजारों भारतीय नाविकों के मौजूद होने की भी संभावना जताई जा रही है.
पहले भी चल चुका है ‘ऑपरेशन संकल्प’
अगर भारत सरकार नौसेना भेजने का फैसला करती है तो यह पहली बार नहीं होगा. 19 जून 2019 को भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन संकल्प शुरू किया था.
इस अभियान के तहत होर्मुज स्ट्रेट, अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षा प्रदान की गई थी. उस समय आईएनएस तलवार जैसे युद्धपोत लंबे समय तक खाड़ी क्षेत्र में तैनात रहे और रोजाना औसतन 16 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकाला गया.
पहले भी चल चुके हैं कई सुरक्षा अभियान
भारतीय नौसेना इससे पहले भी समुद्री सुरक्षा के लिए कई बड़े ऑपरेशन चला चुकी है. यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के लिए भी अभियान चलाए गए थे.
इसके अलावा सोमालिया के समुद्री डाकुओं से भारतीय जहाजों की रक्षा के लिए भी नौसेना सक्रिय रही है.
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान का बयान
ईरान की ओर से पहले कहा गया था कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को सिर्फ अमेरिका, इजरायल और उनके पश्चिमी सहयोगियों के लिए बंद किया है.
ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने रायसीना डायलॉग के दौरान कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है.
भारतीय सूत्रों के अनुसार, ईरान ने यह भरोसा भी दिया है कि वह फारस की खाड़ी में पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाएगा. इससे वहां फंसे भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ते से निकलने की उम्मीद बढ़ी है.
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