ईरान में प्रदर्शनकारियों का हुआ कत्लेआम! 5000 से अधिक लोग मारे गए, तेहरान ने कबूला सच

Iran Protests Death: ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार की ओर से एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रविवार को बताया कि अब तक कम से कम पांच हजार लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है.

Protestors massacred in Iran More than 5000 people were killed Tehran admitted the truth
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Iran Protests Death: ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार की ओर से एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रविवार को बताया कि अब तक कम से कम पांच हजार लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. इन मृतकों में लगभग 500 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. अधिकारी के अनुसार, इन जानमाल के नुकसान के लिए आतंकवादी तत्व और हथियारबंद उपद्रवी जिम्मेदार हैं, जिन्होंने हिंसा के दौरान कई निर्दोष नागरिकों को भी निशाना बनाया.

सुरक्षा कारणों से नाम न बताने वाले इस अधिकारी ने बताया कि उत्तर-पश्चिमी ईरान के कुर्द बहुल क्षेत्रों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे. इन इलाकों में हिंसा और मौतों की संख्या अन्य हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक रही. कुर्द क्षेत्र पहले से ही अस्थिरता और अशांति के लिए जाने जाते रहे हैं, जहां लंबे समय से अलगाववादी गुट सक्रिय हैं. अधिकारी ने कहा कि पिछले वर्षों में जब-जब देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, तब इन क्षेत्रों में झड़पें सबसे ज्यादा हिंसक रूप लेती रही हैं.

क्या मौतों का आंकड़ा और बढ़ेगा?

ईरानी अधिकारी का कहना है कि मृतकों की संख्या में अब बहुत ज्यादा इजाफा होने की संभावना नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल कई लोगों को विदेशों से समर्थन मिला था. उनके मुताबिक, इजराइल और अन्य बाहरी हथियारबंद संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को न सिर्फ उकसाया बल्कि हथियार भी मुहैया कराए. 
ईरान सरकार लंबे समय से देश में होने वाली अशांति के पीछे विदेशी ताकतों की साजिश का आरोप लगाती रही है और इस बार भी उसने अपने कट्टर दुश्मन इजराइल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है. गौरतलब है कि बीते साल जून में इजराइल की ओर से ईरान पर सैन्य हमले भी किए गए थे.

मानवाधिकार संगठनों के अलग आंकड़े

सरकारी दावों से अलग अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA ने एक अलग तस्वीर पेश की है. संगठन के अनुसार अब तक करीब 3,308 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4,382 मामलों की जांच अभी जारी है. HRANA का यह भी दावा है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान 24 हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. 

वहीं, नॉर्वे में स्थित ईरानी कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव ने भी कहा है कि दिसंबर के आखिर में शुरू हुए प्रदर्शनों के दौरान सबसे ज्यादा और सबसे हिंसक झड़पें उत्तर-पश्चिमी कुर्द इलाकों में ही देखने को मिलीं.

19 दिनों की हिंसा में भारी तबाही

लगातार 19 दिनों तक चले इन हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद अब हालात के शांत होने की बात कही जा रही है, लेकिन इस दौरान देश को भारी नुकसान झेलना पड़ा है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 30 प्रांतों में करीब 250 मस्जिदों और 20 धार्मिक केंद्रों को नुकसान पहुंचा. इसके अलावा 182 एम्बुलेंस और अग्निशमन विभाग से जुड़े उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए, जिससे करीब 5.3 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ.

बैंकिंग, बिजली और शिक्षा व्यवस्था पर असर

हिंसा के दौरान बैंकिंग सेक्टर को भी बड़ा झटका लगा. 317 बैंक शाखाएं पूरी तरह तबाह हो गईं, जबकि करीब 4,700 बैंकों को 10 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा. इसके अलावा 1,400 एटीएम मशीनों को नुकसान हुआ, जिनमें से 250 पूरी तरह बंद हो गईं. बिजली क्षेत्र में भी करीब 6.6 मिलियन डॉलर के नुकसान की बात सामने आई है.

सांस्कृतिक और शैक्षणिक धरोहरों को नुकसान

प्रदर्शनों की आग से शिक्षा और संस्कृति से जुड़ी संस्थाएं भी नहीं बच सकीं. करीब 265 स्कूल और शिक्षा केंद्र क्षतिग्रस्त हुए, वहीं तीन बड़ी लाइब्रेरियों, आठ सांस्कृतिक और पर्यटन स्थलों तथा चार सिनेमाघरों को भी नुकसान पहुंचा. सरकार और मानवाधिकार संगठनों के आंकड़ों में भले ही फर्क हो, लेकिन यह साफ है कि इन विरोध प्रदर्शनों ने ईरान को सामाजिक, आर्थिक और मानवीय स्तर पर गहरा झटका दिया है.

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