वारसॉ से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है. नेताओं और पत्रकारों के बीच तीखे सवाल-जवाब आम बात है, लेकिन पोलैंड के एक सीनेटर ने इस हद तक जाकर बदतमीजी की कि सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है. घटना के दौरान एक महिला पत्रकार उनसे सवाल कर रही थी और जवाब न दे पाने की स्थिति में सीनेटर ने अचानक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे देश में विवाद खड़ा कर दिया.
बुधवार को पोलिश सीनेट के गलियारे में PiS पार्टी के सदस्य और सीनेटर वोज्शिएक स्कुर्कीविक्ज TVP चैनल की पत्रकार जस्टीना डोब्रोश-ओराज को इंटरव्यू दे रहे थे. बातचीत का विषय था. यूक्रेन और रूस के बीच संभावित शांति समझौता. जैसे-जैसे सवाल कठिन होते गए, सीनेटर जवाब देने में लड़खड़ाने लगे. रिपोर्टर ने जब उन्हें लगातार तथ्यों पर घेरा, तो माहौल और तनावपूर्ण हो गया.
महिला पत्रकार को छूने लगे सीनेटर
कठिन सवालों से असहज हो चुके सीनेटर अचानक रिपोर्टर का माइक निकालने लगे, जो उसकी गर्दन के पास लगा हुआ था. रिपोर्टर बार-बार पीछे हटते हुए कहती रही "दूर रहो, मुझे मत छुओ!" लेकिन सीनेटर अपनी हरकत से पीछे नहीं हटे. इस अप्रत्याशित और अस्वीकार्य व्यवहार ने पत्रकार को इतना असहज कर दिया कि वह इंटरव्यू बीच में ही छोड़कर चली गई. पूरी घटना वहीं मौजूद कैमरों में रिकॉर्ड हो गई, और कुछ ही देर में वीडियो इंटरनेट पर फैल गया.
🇵🇱In Poland, a journalist’s conversation with a senator suddenly turned into a scandal: “Please do not touch me.”
— NEXTA (@nexta_tv) December 11, 2025
The confrontation broke out in the corridors of the Polish Sejm during a discussion about ending the war in Ukraine and Poland’s alleged absence from the negotiation… pic.twitter.com/XJqTADGz0j
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सीनेटर स्कुर्कीविक्ज की कड़ी आलोचना शुरू कर दी. कमेंट्स में लोगों ने कहा कि किसी भी महिला को चुप कराने के लिए फिजिकल टच का इस्तेमाल करना 'सीधा-सीधा हमला' है. कई यूजर्स ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का सबसे भद्दा रूप बताया.
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप, शिकायत दर्ज
मामला इतना गंभीर हो गया कि यूरोपीय सांसद क्रिस्टोफ ब्रेजा खुद आगे आए और बताया कि उन्होंने सीनेटर के खिलाफ नैतिकता समिति में औपचारिक शिकायत दर्ज कर दी है. विपक्षी दलों ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और तत्काल कार्रवाई की मांग की है. पोलैंड की राजनीति में यह घटना महिला सुरक्षा, प्रेस फ्रीडम और पावर मिसयूज पर बड़ी बहस छेड़ चुकी है.
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