Balochistan Conflict: पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है. सोमवार को केच जिले में पाकिस्तानी सेना के गश्ती दल पर किए गए घातक हमले ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि यह भी साबित किया कि बलूच विद्रोह अब और अधिक संगठित और आक्रामक होता जा रहा है.
हमले में सेना के एक कैप्टन वकार समेत पांच सुरक्षाकर्मी मारे गए. बताया जा रहा है कि यह हमला एक IED विस्फोट के ज़रिए किया गया, जब सेना की टुकड़ी इलाके में रूटीन गश्त कर रही थी.
BLA का वीडियो और दावा, बढ़ती आक्रामकता का संकेत
हमले के कुछ ही घंटों के भीतर बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए एक वीडियो भी जारी किया. वीडियो में तंप और जमुरान इलाकों में समन्वित विस्फोटों की फुटेज साझा की गई, जिसमें कई पाकिस्तानी सैन्य वाहनों को उड़ाया गया. BLA के मुताबिक, इन हमलों में कुल 9 सैनिक मारे गए और 3 घायल हुए.
हालांकि, पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़े इससे कम हैं, जिससे स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच दावों को लेकर भारी अंतर है.
2025 में BLA का अभियान, आंकड़ों में हिंसा
बलूच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग ‘हक्कल मीडिया’ के अनुसार, साल 2025 की पहली छमाही में उन्होंने कुल 284 सशस्त्र हमले किए हैं, जिनमें 668 से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है. यह संख्या बीते वर्ष पूरे साल के हमलों के आंकड़ों के लगभग बराबर है, 2024 में BLA ने 302 हमलों का दावा किया था. यह वृद्धि बताती है कि बलूच विद्रोह अब न सिर्फ भौगोलिक रूप से फैला है, बल्कि रणनीतिक रूप से भी अधिक सुसंगठित हो चुका है.
BLA का एजेंडा, “स्वतंत्र बलूचिस्तान” की मांग
बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान द्वारा शासित बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राज्य बनाने की मांग करता है. संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान की सेना बलूच जनता पर दमनात्मक नीति अपना रही है, जहां स्थानीय लोगों को उनके प्राकृतिक संसाधनों, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सांस्कृतिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है.
BLA की रणनीति सैन्य ठिकानों, खुफिया नेटवर्क और पाकिस्तान समर्थित मिलिशियाओं पर हमलों के ज़रिए क्षेत्र में दबाव बनाना है.
असंतोष की जड़ें गहरी
विश्लेषकों के अनुसार बलूचिस्तान की स्थिति महज़ एक सैन्य समस्या नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक असंतुलन का परिणाम है. क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर जबरन ज़मीन अधिग्रहण, बेरोजगारी, संसाधनों की लूट और राजनीतिक उपेक्षा, ये सभी कारण वहां के युवाओं को उग्रवाद की ओर धकेल रहे हैं.
कड़ी निंदा, सीमित समाधान
पाकिस्तानी सरकार ने इस हमले को “आतंकवादी गतिविधि” बताते हुए दोषियों के खिलाफ अभियान शुरू करने की बात कही है. लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ सैन्य बल के ज़रिए इस आंदोलन को दबाया जा सकता है?
अतीत के अनुभव यही बताते हैं कि बलूच समस्या का स्थायी समाधान तब तक संभव नहीं जब तक कि राजनीतिक संवाद, संसाधनों की न्यायसंगत हिस्सेदारी और मानवाधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता न दी जाए.
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