क्या भारत ने ईरान से चाइनीज युआन में पेमेंट कर खरीदा तेल? विदेश मंत्रालय ने खुद बता दी सच्चाई

ईरान, अमेरिका और वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर चल रहे तनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर तेजी से वायरल हो रही है.

Is India buying oil from Iran by paying in Chinese Yuan amid war
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

ईरान, अमेरिका और वैश्विक ऊर्जा बाजार को लेकर चल रहे तनाव के बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ी खबर तेजी से वायरल हो रही है. दावा किया जा रहा था कि भारत ने ईरान से तेल खरीदने के लिए चीनी मुद्रा युआन में भुगतान किया है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए.

हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और इसे भ्रामक बताया है.

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में यह चर्चा तेज हुई कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए ईरान नई शर्तें लागू कर सकता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान कथित तौर पर उन जहाजों को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है, जो अमेरिकी डॉलर की बजाय चीनी युआन में भुगतान करेंगे.

इसी के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैल गया कि भारत ने भी इस शर्त को मानते हुए युआन में भुगतान किया है.

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?

भारत के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है. सरकार की ओर से साफ कहा गया है कि युआन में भुगतान करने जैसी कोई आधिकारिक जानकारी या निर्णय नहीं लिया गया है.

यानी फिलहाल भारत द्वारा ईरान को चीनी मुद्रा में तेल भुगतान करने की बात महज अफवाह है.

होर्मुज के पास फंसे हैं भारतीय जहाज

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समय भारत के झंडे वाले करीब 22 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद हैं.

इन जहाजों में लगभग 17 लाख टन कच्चा तेल, एलएनजी और पीएनजी लदा हुआ है. ऐसे में इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और आवाजाही भारत के लिए बेहद अहम है.

ईरान का क्या है रुख?

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान सीमित संख्या में टैंकरों को ही इस रास्ते से गुजरने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है.

इसके साथ ही यह भी संकेत दिए गए हैं कि भुगतान के तरीके में बदलाव किया जा सकता है, जिसमें डॉलर की जगह युआन को प्राथमिकता दी जा सकती है.

हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.

भारत-ईरान के बीच लगातार बातचीत

स्थिति को देखते हुए भारत और ईरान के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है.

एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से बातचीत की है, जिसमें क्षेत्रीय हालात और तेल आपूर्ति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ईरान के साथ संपर्क में हैं, ताकि हालात को संतुलित रखा जा सके.

पेट्रोडॉलर बनाम पेट्रोयुआन की बहस

इस पूरे मामले ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में डॉलर के दबदबे पर बहस छेड़ दी है. दशकों से तेल का व्यापार अमेरिकी डॉलर में होता आया है, जिसे ‘पेट्रोडॉलर सिस्टम’ कहा जाता है.

लेकिन हाल के वर्षों में चीन ने ‘पेट्रोयुआन’ के जरिए इस व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की है. रूस और ईरान जैसे देश भी डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं.

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