PM Modi Meeting On West Asia Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अहम हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की. प्रधानमंत्री आवास पर करीब साढ़े तीन घंटे तक चली इस लंबी बैठक में कई बड़े मंत्री और अधिकारी शामिल हुए. इसमें गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद रहे.
इस दौरान एलपीजी सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल और केरोसीन जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई पर विस्तार से चर्चा हुई. सरकार की तरफ से साफ कहा गया कि युद्ध जैसी स्थिति के बावजूद देश में जरूरी सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ने दिया जाएगा.
सप्लाई मजबूत रखने पर जोर
बैठक में प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम और खाद मंत्रालय को साफ निर्देश दिए कि तेल, गैस और उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक तैयार रखा जाए. उनका मकसद यह है कि अंतरराष्ट्रीय हालात खराब होने के बावजूद भारत में किसी तरह की कमी न हो और सप्लाई लगातार जारी रहे.
समुद्री रास्तों और सुरक्षा पर चर्चा
बैठक में अजीत डोभाल ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भी जानकारी दी. खास तौर पर Strait of Hormuz और लाल सागर के हालात पर चर्चा हुई. प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर इन रास्तों पर खतरा बढ़ता है, तो भारत को वैकल्पिक समुद्री मार्गों और कूटनीतिक उपायों पर काम करना होगा.
आम जनता पर बोझ न बढ़े
सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतें बढ़ने का सीधा असर आम लोगों पर न पड़े. बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि लोगों को राहत देने के लिए जरूरी आर्थिक कदम उठाए जाएंगे, ताकि महंगाई का दबाव कम रखा जा सके.
सप्लाई चेन पर बढ़ता खतरा
28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण और जहाजों की आवाजाही सीमित करने से वैश्विक शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से मंगाता है, इसलिए यह स्थिति देश के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
सरकार के राहत कदम
इस संकट के बीच सरकार ने एलपीजी की सप्लाई को लेकर कई कदम उठाए हैं. घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई फिलहाल सामान्य बनी हुई है और लोगों में घबराहट भी कम हुई है. राज्यों को कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई बढ़ाई गई है और अस्पतालों व शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है.
साथ ही, कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में छापेमारी की जा रही है. सरकार पाइप गैस (PNG) के विस्तार और बंदरगाहों के सुचारु संचालन पर भी ध्यान दे रही है.
‘नेशनल कैरेक्टर’ की परीक्षा
इससे पहले 12 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह संकट सिर्फ एक युद्ध नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी परीक्षा है. उन्होंने इसे ‘नेशनल कैरेक्टर’ की कसौटी बताते हुए लोगों से धैर्य रखने और सतर्क रहने की अपील की थी.
कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भारत
युद्ध शुरू होने के बाद से भारत कूटनीतिक स्तर पर भी काफी सक्रिय है. प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान जैसे कई देशों के नेताओं से बातचीत की है. इस बैठक में इन चर्चाओं के नतीजों और वैकल्पिक सप्लाई के विकल्पों पर भी विचार किया गया. सरकार का पूरा फोकस इस बात पर है कि चाहे हालात जैसे भी हों, देश में जरूरी चीजों की सप्लाई बनी रहे और आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो.
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