इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं. बलूच वॉयस एसोसिएशन (BVA) ने संयुक्त राष्ट्र (UN) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि वहां लोगों के खिलाफ जबरन गायब करने, बिना मुकदमे हिरासत में रखने और कथित फर्जी मुठभेड़ों जैसी घटनाएं हो रही हैं.
रिपोर्ट में पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियों पर बलूच लोगों के साथ सख्ती और दमन करने के आरोप लगाए गए हैं.
सैकड़ों लोगों के गायब होने का दावा
BVA की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में हर साल बड़ी संख्या में लोग लापता हो रहे हैं. इनमें छात्र, डॉक्टर, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल हैं.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 के पहले छह महीनों में 885 से ज्यादा लोगों के जबरन गायब होने और 121 लोगों की मौत का जिक्र है.
हिरासत और टॉर्चर के लगाए आरोप
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कई लोगों को हिरासत में लेने के बाद उनके साथ मारपीट और यातना की जाती है. कुछ मामलों में लोगों के शव लावारिस हालत में मिलने का भी दावा किया गया है.
मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.
प्राकृतिक संसाधनों के बावजूद गरीबी का दावा
BVA ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बलूचिस्तान तेल, गैस, तांबा और सोने जैसे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, लेकिन इसके बावजूद वहां बड़ी संख्या में लोग गरीबी और पिछड़ेपन का सामना कर रहे हैं.
रिपोर्ट में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. संगठन का आरोप है कि इस परियोजना का फायदा स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है.
शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आरोप
रिपोर्ट में बलूच अधिकार कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है. BVA ने आरोप लगाया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर भी दबाव बनाया जा रहा है.
संगठन ने बलूच यकजेहती कमेटी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है.
पत्रकारों की आजादी पर भी उठे सवाल
BVA ने दावा किया है कि बलूचिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए माहौल मुश्किल होता जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पत्रकारों को डराने, हिरासत में लेने और दबाव बनाने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है.
संगठन का आरोप है कि कानूनों का इस्तेमाल पत्रकारों और आलोचकों की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है.
मानवाधिकारों को लेकर बढ़ा दबाव
BVA की रिपोर्ट के बाद बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है. संगठन का कहना है कि समस्याओं का समाधान बातचीत और न्यायपूर्ण तरीके से होना चाहिए, न कि बल प्रयोग से.
हालांकि, पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर जवाब दिए जाते रहे हैं और वह सुरक्षा अभियानों को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताती रही है.
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