FCRA Amendment Bill 2026: संसद के मानसून सत्र को लेकर पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं. सत्र की अवधि बढ़ने, परिसीमन विधेयक पर विशेष सत्र बुलाए जाने और सरकार के विधायी एजेंडे को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं. अब केंद्र सरकार ने इन तमाम चर्चाओं पर लगभग विराम लगा दिया है. सरकार की ओर से साफ कर दिया गया है कि फिलहाल मानसून सत्र को बढ़ाने या परिसीमन विधेयक के लिए अलग से विशेष सत्र बुलाने की कोई योजना नहीं है. हालांकि, इस बीच सरकार विदेशी अंशदान से जुड़े नियमों में बदलाव करने वाले विदेशी अंशदान (संशोधन) विधेयक, 2026 को संसद से पारित कराने की तैयारी में है.
यह प्रस्तावित विधेयक केवल कानूनी संशोधन नहीं, बल्कि विदेशी फंडिंग के प्रबंधन, निगरानी और जवाबदेही को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. साथ ही संसद में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच इस विधेयक पर चर्चा भी अहम मानी जा रही है.
13 अगस्त तक ही चलेगा मानसून सत्र
संसद का मौजूदा मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त को समाप्त होगा. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि सरकार के पास फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. इसके साथ ही 16 से 18 अगस्त के बीच महिला आरक्षण या परिसीमन विधेयक पर विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलों को भी सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. सरकार का कहना है कि मौजूदा संसदीय कार्यक्रम के अनुसार ही कार्यवाही आगे बढ़ेगी.
क्या है विदेशी अंशदान (संशोधन) विधेयक, 2026?
सरकार द्वारा लाया जा रहा यह विधेयक विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (FCRA) में संशोधन का प्रस्ताव रखता है. यह कानून भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग और उसके उपयोग को नियंत्रित करता है. सरकार का उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग में अधिक पारदर्शिता लाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और ऐसे मामलों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है. सूत्रों के अनुसार, यदि संसद में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होती है तो गृह मंत्री अमित शाह सरकार का पक्ष रखते हुए बहस का जवाब दे सकते हैं.
रद्द हुए FCRA पंजीकरण पर बनेगा नया निगरानी तंत्र
प्रस्तावित संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान एक 'नामित प्राधिकरण' के गठन से जुड़ा है. यह प्राधिकरण उन संस्थाओं की संपत्तियों और विदेशी फंड की निगरानी करेगा, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो चुका है, समाप्त हो गया है या जिन्होंने स्वयं अपना पंजीकरण सरेंडर कर दिया है. ऐसी स्थिति में संबंधित संस्था के पास बचा विदेशी फंड और उससे जुड़ी संपत्तियां अस्थायी रूप से इस प्राधिकरण के नियंत्रण में चली जाएंगी. यदि संस्था निर्धारित समय के भीतर अपना पंजीकरण दोबारा बहाल करा लेती है, तो उसकी संपत्ति और धन वापस कर दिए जाएंगे. लेकिन तय समयसीमा तक पंजीकरण बहाल नहीं होने पर वह संपत्ति स्थायी रूप से प्राधिकरण के अधिकार में चली जाएगी.
धार्मिक संपत्तियों की सुरक्षा पर रहेगा विशेष फोकस
विधेयक में धार्मिक स्थलों और पूजा से जुड़ी संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं. यदि किसी संस्था का पंजीकरण समाप्त या रद्द हो जाता है और उसके पास कोई धार्मिक स्थल या पूजा स्थल है, तो उसका धार्मिक स्वरूप किसी भी स्थिति में नहीं बदला जाएगा. नामित प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी कि ऐसी संपत्तियों के धार्मिक चरित्र की पूरी तरह रक्षा की जाए. इसके अलावा यदि किसी संस्था को प्राधिकरण के आदेश पर आपत्ति होती है, तो उसे पुनर्विचार याचिका दायर करने और न्यायालय में अपील करने का पूरा अधिकार मिलेगा.
सजा और जांच प्रक्रिया में भी होंगे बदलाव
प्रस्तावित संशोधन में कुछ दंडात्मक प्रावधानों को भी व्यावहारिक बनाने का प्रयास किया गया है. कानून के उल्लंघन पर अधिकतम पांच वर्ष की जेल की सजा को घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है. साथ ही अब किसी भी राज्य की जांच एजेंसी FCRA से जुड़े मामलों की जांच केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना शुरू नहीं कर सकेगी. सरकार का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और कानून के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी.
संसद में जारी गतिरोध के बीच बढ़ेगी चुनौती
एक ओर सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक को संसद से पारित कराने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर मानसून सत्र लगातार विपक्ष के विरोध और हंगामे की वजह से प्रभावित हो रहा है. दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है, जिसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि सदन में सार्थक चर्चा न होने और बिना बहस के विधेयक पारित होने जैसी परिस्थितियों के लिए विपक्ष का रवैया जिम्मेदार है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार FCRA संशोधन विधेयक को चर्चा के साथ पारित करा पाती है या संसद का गतिरोध इस प्रक्रिया को और प्रभावित करता है.
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