ब्रह्मोस, अग्नि-5 और K4... भारत की वो तीन मिसाइलें, जिनसे खौफ में रहते हैं दुश्मन! जानें इनकी ताकत

भारत की सुरक्षा के लिए चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करना बेहद जरूरी है. इसी वजह से भारत लगातार नई मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और रक्षा प्रणालियों को विकसित कर रहा है.

BrahMos Agni-5 and K-4 the three Indian missiles that strike fear into the enemy
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

भारत की सुरक्षा के लिए चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करना बेहद जरूरी है. इसी वजह से भारत लगातार नई मिसाइलों, लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और रक्षा प्रणालियों को विकसित कर रहा है.

मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल है. भारत के पास कई आधुनिक मिसाइलें हैं, लेकिन अग्नि-5, के-4 और ब्रह्मोस को देश की सबसे अहम रणनीतिक ताकतों में गिना जाता है. इनमें से कुछ मिसाइलों की ताकत पूरी दुनिया देख चुकी है, जबकि कुछ का इस्तेमाल अभी तक करने की जरूरत नहीं पड़ी है.

अग्नि-5: लंबी दूरी तक हमला करने वाली परमाणु मिसाइल

अग्नि-5 भारत की सबसे शक्तिशाली लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है. इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने तैयार किया है. यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और करीब 5,000 से 5,800 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती है.

इसकी मारक क्षमता इतनी ज्यादा है कि यह एशिया के बड़े हिस्से और कुछ यूरोपीय क्षेत्रों तक पहुंच सकती है. करीब 17 मीटर लंबी अग्नि-5 तीन चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन से चलती है.

इस मिसाइल में आधुनिक दिशा नियंत्रण प्रणाली लगाई गई है, जिससे इसकी सटीकता काफी बढ़ जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत एमआईआरवी तकनीक है. इस तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल से अलग-अलग लक्ष्यों पर कई परमाणु हथियार भेजे जा सकते हैं.

एमआईआरवी तकनीक हासिल करने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास ऐसी क्षमता वाली मिसाइलें हैं.

अग्नि-5 को सड़क और रेल से ले जाने वाले मोबाइल लॉन्च सिस्टम के साथ बनाया गया है. इससे जरूरत पड़ने पर इसे जल्दी तैनात किया जा सकता है और दुश्मन के लिए इसे निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है.

ब्रह्मोस: रफ्तार और सटीक हमले की ताकत

ब्रह्मोस भारत और रूस के संयुक्त सहयोग से बनाई गई दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल है. यह मिसाइल करीब तीन गुना ध्वनि की रफ्तार से उड़ सकती है.

इसका निर्माण ब्रह्मोस एयरोस्पेस करती है. तेज गति, कम समय में हमला करने की क्षमता और सटीक निशाने के कारण ब्रह्मोस भारतीय सेना की बड़ी ताकत मानी जाती है.

ब्रह्मोस के नए संस्करणों की मारक क्षमता 400 से 800 किलोमीटर तक बताई जाती है. इसे जमीन से, युद्धपोतों से, पनडुब्बियों से और लड़ाकू विमान से भी लॉन्च किया जा सकता है.

भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों से भी ब्रह्मोस मिसाइल दागी जा सकती है. इसकी यही खासियत इसे तीनों सेनाओं के लिए बेहद उपयोगी बनाती है.

भारत लगातार ब्रह्मोस के नए और ज्यादा ताकतवर संस्करणों पर काम कर रहा है. आने वाले समय में इसकी रेंज और क्षमता को और बढ़ाने की तैयारी है.

के-4 मिसाइल: समुद्र से दुश्मन पर नजर रखने वाली ताकत

के-4 भारत की पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है. इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसकी मारक क्षमता करीब 3,500 किलोमीटर बताई जाती है.

यह मिसाइल भारत की अरिहंत श्रेणी की परमाणु पनडुब्बियों से लॉन्च करने के लिए बनाई गई है. इसकी मदद से भारत की समुद्र से जवाबी हमला करने की क्षमता और मजबूत होती है.

के-4 में आधुनिक नेविगेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे यह अपने लक्ष्य तक ज्यादा सटीक तरीके से पहुंच सकती है. इसमें ठोस ईंधन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है.

इस मिसाइल की खास बात इसकी कोल्ड लॉन्च तकनीक है. इसमें मिसाइल पहले पानी के दबाव से पनडुब्बी से बाहर निकलती है और उसके बाद इसका इंजन शुरू होता है. इससे पनडुब्बी को नुकसान पहुंचने का खतरा कम होता है.

के-4 भारत की परमाणु त्रिकोणीय क्षमता यानी जमीन, हवा और समुद्र से जवाबी हमला करने की रणनीति का अहम हिस्सा है. यह भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

भारत की मिसाइल ताकत का मजबूत आधार

अग्नि-5, ब्रह्मोस और के-4 भारत की रक्षा क्षमता के तीन अहम स्तंभ हैं. एक तरफ अग्नि-5 लंबी दूरी तक रणनीतिक हमला करने की ताकत देती है, वहीं ब्रह्मोस तेज और सटीक हमले की क्षमता बढ़ाती है. दूसरी ओर के-4 समुद्र से भारत की जवाबी कार्रवाई को मजबूत बनाती है.

इन मिसाइलों की वजह से भारत की रक्षा क्षमता और परमाणु सुरक्षा व्यवस्था को बड़ी मजबूती मिली है. यही ताकत दुश्मनों को किसी भी कार्रवाई से पहले कई बार सोचने पर मजबूर करती है.

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