जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के श्रीनगर दौरे के दौरान दिए गए बयान पर पाकिस्तान ने कड़ी आपत्ति जताई है. गोर ने जम्मू-कश्मीर को “भारत का अहम हिस्सा” बताया था.
इसके बाद पाकिस्तान ने इस बयान को “गैर-जिम्मेदाराना” करार देते हुए इस्लामाबाद में अमेरिकी Charge dAffaires को तलब किया. पाकिस्तान ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और इसके समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन किया जाना चाहिए.
सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को बताया भारत का हिस्सा
दरअसल, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर के दौरे पर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताया. उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक खूबसूरती की भी तारीफ की और कहा कि बहुत से अमेरिकी यहां आकर इसकी खूबसूरती देखना चाहेंगे. गोर ने जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका की Travel Advisory की समीक्षा और उसे downgrade किए जाने की बात भी कही. उनके इस बयान को भारत के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेद लगातार बने हुए हैं.
पाकिस्तान ने अमेरिकी Charge dAffaires को किया तलब
19 अगस्त को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि इस्लामाबाद में अमेरिकी Charge dAffaires को तलब किया गया और अमेरिकी राजदूत के बयान पर strong demarche दिया गया.
पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने को खारिज कर दिया. पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना पुराना दावा दोहराया कि जम्मू-कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और इसके समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का पालन होना चाहिए. इस तरह पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को लेकर औपचारिक तौर पर अपना विरोध दर्ज कराया है.
अमेरिका को उसी की कश्मीर नीति भी याद दिलाई
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया में उसने अमेरिका के जम्मू-कश्मीर को लेकर पुराने रुख का भी उल्लेख किया. पाकिस्तान ने कहा कि अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिका के लंबे समय से चले आ रहे रुख के अनुरूप नहीं है.
पाकिस्तान ने अमेरिका से यह भी कहा कि भविष्य में उसके सार्वजनिक बयान जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान द्वारा बताए जाने वाले विवादित दर्जे के अनुरूप होने चाहिए. इस बयान के जरिए इस्लामाबाद ने स्पष्ट करने की कोशिश की कि वह जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी अधिकारियों की किसी भी ऐसी टिप्पणी को स्वीकार नहीं करेगा, जिसमें इस क्षेत्र को भारत का हिस्सा बताया जाए.
ट्रंप के मध्यस्थता प्रस्ताव का भी किया जिक्र
पाकिस्तान ने अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के प्रस्ताव का भी जिक्र किया और उसकी सराहना की. यह घटनाक्रम इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि एक ओर पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत के बयान पर अमेरिकी राजनयिक को तलब किया, वहीं दूसरी ओर ट्रंप के मध्यस्थता वाले प्रस्ताव को सामने रखकर अमेरिका को उसके पुराने बयानों की याद दिलाई.
भारत लंबे समय से स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इससे जुड़े मामले भारत के आंतरिक विषय हैं. ऐसे में अमेरिकी राजदूत का जम्मू-कश्मीर दौरा, उसे भारत का हिस्सा बताना और अमेरिकी Travel Advisory को downgrade करने की संभावना जताना महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं. पाकिस्तान की तीखी प्रतिक्रिया यह भी दिखाती है कि सर्जियो गोर के बयान ने इस्लामाबाद में कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है.
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