GDP Growth: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच केंद्रीय बैंक ने सतर्क रुख अपनाया है. इसके साथ ही पॉलिसी स्टांस को भी न्यूट्रल बनाए रखा गया है.
मौद्रिक नीति समिति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता को लेकर चिंता व्यक्त की है. हालांकि आरबीआई का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इन चुनौतियों का सामना करने की स्थिति में है.
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है और देश वैश्विक झटकों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है.
पश्चिम एशिया संकट का असर
आरबीआई के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात ने वैश्विक आर्थिक माहौल को प्रभावित किया है. इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है, जबकि सप्लाई चेन पर भी दबाव बढ़ा है.
केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन परिस्थितियों का असर दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है, लेकिन भारत के पास इस चुनौती से निपटने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है.
महंगाई का अनुमान बढ़ाया गया
वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) के अनुमान को बढ़ा दिया है. अप्रैल में जहां महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया है.
केंद्रीय बैंक का मानना है कि ऊर्जा कीमतों और वैश्विक आपूर्ति से जुड़े जोखिमों का असर आने वाले महीनों में महंगाई पर पड़ सकता है.
आर्थिक विकास दर के अनुमान में कटौती
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को भी कम कर दिया है. पहले जहां विकास दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था, उसे घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है.
केंद्रीय बैंक के अनुसार वैश्विक तनाव, बढ़ती तेल कीमतें और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितताएं भारत की विकास गति को प्रभावित कर सकती हैं.
तिमाही आधार पर GDP ग्रोथ का अनुमान
हालांकि आरबीआई को उम्मीद है कि वर्ष के दूसरे हिस्से में आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखने को मिल सकता है.
विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर भी सकारात्मक जानकारी दी. उन्होंने बताया कि रुपये को स्थिर रखने के लिए किए गए हस्तक्षेप के बाद भले ही विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट आई थी, लेकिन अब स्थिति बेहतर हुई है.
5 जून तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 62.3 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है. इससे बाहरी आर्थिक चुनौतियों का सामना करने की भारत की क्षमता मजबूत होती है.
संतुलन बनाने की कोशिश में RBI
आरबीआई का ताजा आकलन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में महंगाई और आर्थिक विकास दोनों पर वैश्विक घटनाक्रमों का असर देखने को मिल सकता है. ऐसे में केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव से बचते हुए महंगाई नियंत्रण और विकास को संतुलित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में सुधार नहीं हुआ, तो महंगाई और विकास दर दोनों पर दबाव बना रह सकता है. वहीं तेल कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर आगे भी बाजार की नजर बनी रहेगी.
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