इस्लामाबाद: पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने के मुद्दे पर सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है. सिंध ने प्रांत के बंटवारे या नए प्रशासनिक इलाके बनाने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध किया है. सिंध असेंबली ने ऐसे प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया. सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने भी साफ चेतावनी दी है कि सिंध को बांटने की कोशिश की गई तो इसके गंभीर राजनीतिक नतीजे होंगे.
मुराद अली शाह ने शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर को भी इस मुद्दे पर चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि नेशनल असेंबली को सिंध के बंटवारे पर चर्चा तक नहीं करनी चाहिए. शाह ने कहा कि सिंध की एकता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
नए प्रांत बनाने के मुद्दे पर बढ़ा विवाद
सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने विधानसभा में प्रांत की एकता से जुड़े प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि उनकी सरकार सिंध की सीमाओं और एकता से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि अगर सिंध को बांटने की कोई कोशिश हुई तो इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा.
We must warn the National Assembly not to even discuss the division of Sindh. Consider this a warning.
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) September 4, 2026
A dictator introduced this in the 8th Amendment; we should have abolished it through the 18th Amendment.
What they are trying to do is something even Zia did not have the… pic.twitter.com/RG246znYXg
पाकिस्तान की संघीय सरकार की ओर से देश के मौजूदा चार प्रांतों को बढ़ाकर 12 से 15 प्रांत बनाने का प्रस्ताव सामने आया है. इस प्रस्ताव को लेकर कई राजनीतिक दल नाराज हैं. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी भी इसका विरोध कर रही है. पीपीपी नेता आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताई है. यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पीपीपी के समर्थन से ही शहबाज शरीफ की सरकार सत्ता में है.
नाराज होकर लंदन गए जरदारी?
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इस समय लंदन में हैं. माना जा रहा है कि नए प्रांत बनाने के मुद्दे को लेकर वह नाराज हैं. उनसे मुलाकात के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी लंदन पहुंचे हैं. नकवी को सेना प्रमुख असीम मुनीर का करीबी माना जाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, सेना की ओर से नए प्रांत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने के दबाव से जरदारी नाराज बताए जा रहे हैं. हालांकि, जरदारी नए प्रांत बनाने के विचार को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं. वह चाहते हैं कि अगर ऐसा करना है तो इसकी शुरुआत पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से हो, जबकि सिंध को इस प्रक्रिया से दूर रखा जाए.
सिंध को लेकर पीपीपी की बड़ी चिंता
सिंध लंबे समय से पीपीपी का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है. ऐसे में सिंध को बांटने का फैसला पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान पैदा कर सकता है. यही वजह है कि जरदारी और पीपीपी सिंध को लेकर ज्यादा सतर्क हैं.
वहीं बलूचिस्तान भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील प्रांत है. यहां लंबे समय से उग्रवादी हिंसा जारी है. ऐसे में जरदारी सिंध और बलूचिस्तान में तुरंत नए प्रांत बनाने के खिलाफ बताए जा रहे हैं. इस पूरे मुद्दे ने पाकिस्तान की संघीय सरकार, पीपीपी और सेना के बीच तनाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है.
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