पाकिस्तान ने फिर फैलाए पैसों के लिए हाथ, 7 अरब डॉलर की कर रहा मांग; जानें क्यों

पाकिस्तान, जो पहले से ही गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, अब अपनी एक बड़ी रेलवे परियोजना के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद ने ADB से 7 अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण की मांग की है.

Pakistan is taking 7 billion loan from adb for railway line project
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पाकिस्तान, जो पहले से ही गहरे आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, अब अपनी एक बड़ी रेलवे परियोजना के लिए एशियाई विकास बैंक (ADB) के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद ने ADB से 7 अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण की मांग की है ताकि पेशावर से कराची तक जाने वाली ML-1 मेनलाइन रेलवे को अपग्रेड किया जा सके.

चीन, जो पहले इस परियोजना का बड़ा साझेदार माना जा रहा था, अब इस योजना से पीछे हट गया है. पाकिस्तान सरकार ने इसके बाद अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से मदद लेने का रुख किया है.

चीन ने कर्ज देने से किया इनकार

पाकिस्तान इस परियोजना के लिए चीन से 85% फंडिंग की उम्मीद लगाए बैठा था. लेकिन बीजिंग ने प्रोजेक्ट की लागत को लेकर आपत्ति जताते हुए समर्थन देने से इनकार कर दिया. चीन चाहता था कि इस प्रोजेक्ट की लागत को 10 अरब डॉलर से घटाकर 6.7 अरब डॉलर किया जाए, ताकि इसे आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके.

यह प्रोजेक्ट चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत एकमात्र ऐसा प्रोजेक्ट था जिसे "रणनीतिक रूप से अहम" करार दिया गया था. लेकिन पाकिस्तान की भारी आर्थिक बदहाली और कर्ज के कारण यह योजना पिछले सात वर्षों से अधर में लटकी हुई है.

ADB और AIIB से राहत की उम्मीद

अब पाकिस्तान ने ADB के साथ-साथ एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) से भी इस योजना में वित्तीय भागीदारी की गुहार लगाई है. खबरों के मुताबिक, ADB और AIIB कराची-रोहरी सेक्शन के लिए लगभग 60% फंडिंग देने को तैयार हैं.

मनीला स्थित एडीबी ने इस परियोजना को आकार में बड़ा मानते हुए इसे किस्तों में फंड करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत सबसे पहले कराची-रोहरी खंड पर काम शुरू किया जाएगा.

प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने रखी बात

बुधवार को इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने ADB के अध्यक्ष मासातो कांदा से मुलाकात की. इस बैठक में पाकिस्तान ने प्रोजेक्ट की पूर्ण फंडिंग का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. ADB ने 10 मिलियन डॉलर का रेडीनेस फंड देने का आश्वासन दिया है, जिसका इस्तेमाल चीन द्वारा पहले बनाई गई व्यवहार्यता रिपोर्ट की जांच और विस्तृत डिज़ाइन को अंतिम रूप देने में किया जाएगा. इसी आधार पर आगे की फंडिंग तय होगी.

प्रोजेक्ट की लागत और समयसीमा

सरकारी सूत्रों के अनुसार, सिर्फ कराची-रोहरी खंड पर ही 2 अरब डॉलर और रोहरी-मुल्तान खंड पर 1.6 अरब डॉलर की लागत आने की संभावना है. यानी केवल इन दो हिस्सों पर 3.6 अरब डॉलर का खर्च आ सकता है. प्रधानमंत्री की मंशा है कि जून 2026 तक कार्य शुरू हो, लेकिन रेलवे मंत्रालय और ADB का आकलन है कि दिसंबर 2025 से पहले काम शुरू होना संभव नहीं है. ADB के अनुसार, फंड तभी जारी होगा जब रेडीनेस रिपोर्ट के परिणाम सकारात्मक होंगे.

रेको डिक के लिए अहम है रेलवे लाइन

इस प्रोजेक्ट की एक और अहमियत यह भी है कि यह रेको डिक खदानों से निकाले जाने वाले सोने और तांबे के ट्रांसपोर्ट के लिए जरूरी है. Reko Diq Mining Company ने 2028 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य तय किया है. ऐसे में समय पर रेलवे नेटवर्क तैयार करना अनिवार्य हो गया है.

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