पाकिस्तान अभी तक उस झटके से नहीं उबर पाया है जो उसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के ब्रह्मोस हमलों ने दिया था. 11 एयरबेस तबाह हुए, वायुसेना की रीढ़ टूट गई और पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था बुरी तरह हिल गई. यही वजह है कि वहां के अख़बार अब खुलकर भारत की मिसाइल शक्ति को लेकर डर जताने लगे हैं.
पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित अखबार ‘डॉन’ अब लगातार भारत की सैन्य क्षमता पर लेख प्रकाशित कर रहा है — मानो दुनिया को चेतावनी दे रहा हो कि भारत अब केवल एक पड़ोसी शक्ति नहीं, एक वैश्विक सैन्य ताकत बन चुका है. डॉन की हालिया रिपोर्ट में इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी के विजिटिंग फैकल्टी डॉ. अकील अख्तर ने भारत की बढ़ती समुद्री सैन्य क्षमताओं को पाकिस्तान के लिए "विनाशक खतरा" करार दिया है.
हिंद महासागर में ‘हथियारबंद भारत’ का डर
डॉ. अख्तर का कहना है कि भारत अब सिर्फ एक रक्षा नीति पर नहीं, बल्कि आक्रामक समुद्री रणनीति पर चल रहा है. हिंद महासागर, अरब सागर और प्रशांत क्षेत्र में भारतीय नौसेना की बढ़ती मौजूदगी पाकिस्तान के लिए चिंता का कारण बन चुकी है.
डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की न्यूक्लियर ट्रायड — यानी ज़मीन, हवा और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता — अब अपने चरम पर है. INS अरिहंत और INS अरिघात जैसी पनडुब्बियों ने भारत को वह ताकत दे दी है, जो अब किसी भी देश — चाहे वह चीन हो या अमेरिका — को जवाब देने में सक्षम है.
भारत की ये पनडुब्बियां K-15 (750 किमी) और K-4 (3500 किमी) रेंज की मिसाइलें लेकर चलती हैं, और अब K-5 (6000 किमी) और K-6 (8000 किमी) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें भी टेस्टिंग में हैं. इन क्षमताओं के कारण पाकिस्तान को अब यह डर सता रहा है कि भारत के निशाने की परिधि अब सीमा पार कर वैश्विक हो चुकी है.
न्यूनतम प्रतिरोधक से आक्रामक भारत?
डॉन की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि भारत अब CMD यानी न्यूनतम प्रतिरोधक नीति से भटक रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का MIRV तकनीक (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) की तरफ बढ़ना एक इशारा है कि वह “तत्काल हमले” की तैयारी में है, जिससे रणनीतिक संतुलन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.
इसमें भारत की सेकंड स्ट्राइक कैपिबिलिटी यानी अगर कोई देश भारत पर परमाणु हमला करता है, तो भारत उसके जवाब में पूरे जोर से हमला करेगा — यह नीति अब पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा डरा रही है.
अब भारत सिर्फ पड़ोसी नहीं, एक वैश्विक ताकत है
रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि भारत अब सिर्फ पाकिस्तान या चीन की चुनौती नहीं देख रहा, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में खुद को एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता है. फॉरेन अफेयर्स में छपे कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की वरिष्ठ फेलो एशले जे. टेलिस के लेख का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत अब उसी पुराने सिद्धांत पर चल रहा है — “मित्र नहीं, हित होते हैं.” यानी अब भारत का झुकाव किसी भी एक गुट की तरफ नहीं है, वह अपनी सामरिक ताकत के बल पर स्वतंत्र और निर्णायक भूमिका में आना चाहता है.
पाकिस्तान की अपील: "भारत को रोको"
भारत की बढ़ती क्षमताओं से घबराकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र, यूएन सिक्योरिटी काउंसिल और पश्चिमी ताकतों से अपील की है कि वे भारत को अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलें (जैसे अग्नि-V और अग्नि-VI) बनाने और तैनात करने से रोकें.
डॉन की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत अब 400 से ज़्यादा परमाणु वारहेड रखने में सक्षम है, और उनमें से 100 से ज़्यादा को SSBNs पर तैनात किया जा सकता है. यही डर पाकिस्तान को सबसे ज़्यादा सता रहा है — कि भारत अब न सिर्फ जवाब दे सकता है, बल्कि पहला वार भी पूरी तबाही के साथ कर सकता है.
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