Pakistan Army And JeM: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में पाकिस्तान सेना और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों के कथित संबंधों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं. दावा है कि पाकिस्तान सेना स्थानीय लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े चेहरों का इस्तेमाल कर रही है.
इसी बीच नीलम घाटी में पाकिस्तान सेना से जुड़े एक कार्यक्रम का मामला सामने आया है. दावा किया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में जैश-ए-मोहम्मद की शूरा से जुड़े बताए जा रहे मजहर सईद शाह ने मंच से लोगों को संबोधित किया. हालांकि, इस कार्यक्रम और मजहर सईद शाह की भूमिका से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.
नीलम घाटी की रैली में शामिल होने का दावा
रिपोर्ट्स और सामने आए दावों के मुताबिक, नीलम घाटी में आयोजित एक रैली में मजहर सईद शाह ने स्थानीय लोगों को संबोधित किया. उसके भाषण को लेकर दावा है कि उसने भारत का जिक्र किया और लोगों से दूसरी तरफ से सामने आने वाले वीडियो को लेकर जश्न न मनाने की बात कही. अगर यह दावा सही है तो सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान सेना PoJK में अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े लोगों की मदद ले रही है.
भारत को लेकर दिया कथित बयान
रैली में दिए गए कथित भाषण में भारत का भी जिक्र किया गया. दावा है कि मजहर सईद शाह ने कहा कि पाकिस्तान अपने मामलों को खुद संभाल सकता है. उसने कथित तौर पर ऑपरेशन बनयान-उल-मरूसूस का भी जिक्र किया और कहा कि पाकिस्तान पहले भी भारत के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसा कर सकता है. उसके बयान को भारत के खिलाफ धमकी के तौर पर देखा जा रहा है.
पाक सेना और आतंकी नेटवर्क पर फिर उठे सवाल
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों को भारत समेत कई देशों ने आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है. ऐसे में अगर किसी सेना से जुड़े कार्यक्रम में इन संगठनों से जुड़े व्यक्ति की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो पाकिस्तान सेना और आतंकी नेटवर्क के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल और गंभीर हो सकते हैं. हालांकि, अभी इस पूरे मामले से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है.
PoJK में आतंकी संगठनों के इस्तेमाल का आरोप
भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान की जमीन और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जाता है. जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा पर जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने और भारत के खिलाफ हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं. इन संगठनों से जुड़े ठिकानों और गतिविधियों को लेकर PoJK के मुजफ्फराबाद, कोटली और नीलम घाटी जैसे इलाकों का नाम भी सामने आता रहा है.
LoC के पास लॉन्च पैड का आरोप
भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से दावा करती रही हैं कि PoJK में LoC के आसपास के इलाकों का इस्तेमाल आतंकियों के लॉन्च पैड के तौर पर किया जाता है. आरोप है कि इन जगहों से आतंकियों को जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराने की कोशिश की जाती है.
इसके अलावा, आतंकी संगठनों पर युवाओं को गुमराह कर अपने नेटवर्क में शामिल करने और फिदायीन हमलों के लिए तैयार करने के भी आरोप लगते रहे हैं. ऐसे में नीलम घाटी के कार्यक्रम में आतंकी संगठन से जुड़े व्यक्ति की कथित मौजूदगी ने एक बार फिर पाकिस्तान सेना और आतंकी नेटवर्क के बीच संबंधों को लेकर बहस तेज कर दी है.
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