देश में खाद की कोई कमी नहीं... खरीफ सीजन से पहले सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, रिकॉर्ड स्टॉक तैयार

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण जहां ईंधन और गैस की सप्लाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है, वहीं खाद की उपलब्धता को लेकर भी कई देशों में आशंकाएं जताई जा रही हैं.

no shortage of fertilizer in India Government gave assurance to farmers
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण जहां ईंधन और गैस की सप्लाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है, वहीं खाद की उपलब्धता को लेकर भी कई देशों में आशंकाएं जताई जा रही हैं. खासतौर पर वे देश, जहां बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है, वहां यह मुद्दा और गंभीर बन गया है. लेकिन भारत सरकार ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा है कि देश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है.

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में उर्वरकों की आपूर्ति पूरी तरह स्थिर और पर्याप्त है. उर्वरक विभाग के अनुसार, रबी सीजन 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि यूरिया, डीएपी, एमओपी, एनपीके और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता उनकी मांग से काफी अधिक रही. यही स्थिति मौजूदा वित्त वर्ष में भी बनी हुई है, और खरीफ सीजन से पहले पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

खरीफ 2026 के लिए मजबूत तैयारी

खरीफ सीजन 2026 की जरूरतों को देखते हुए पहले से ही लगभग 46% उर्वरक शुरुआती स्टॉक के रूप में उपलब्ध है, जो सामान्य स्तर (करीब 33%) से काफी ज्यादा है. सरकार ने यह भी बताया कि राज्यों के साथ मिलकर जमाखोरी रोकने और समय पर वितरण सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं.

आयात और घरेलू उत्पादन से मजबूती

भारत अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरकों का आयात भी करता है. पिछले वित्त वर्ष में 100 लाख टन से अधिक यूरिया आयात किया गया था. चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 23 दिनों में ही उपलब्धता आवश्यकता से कई गुना ज्यादा रही है.

  • यूरिया: 69.33 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 18.17 लाख टन
  • डीएपी: 22.78 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 5.90 लाख टन
  • एमओपी: 8.32 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 1.73 लाख टन
  • एनपीके: 52.75 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 7.46 लाख टन
  • एसएसपी: 25.60 लाख टन उपलब्ध, जरूरत 3.30 लाख टन

भंडारण की स्थिति पहले से बेहतर

अप्रैल 2026 के मध्य तक यूरिया का भंडार 67.37 लाख टन रहा, जो पिछले साल के उच्च स्तर के करीब है. डीएपी का स्टॉक बढ़कर 22.16 लाख टन हो गया, जो पिछले साल 13.01 लाख टन था. वहीं एनपीके का भंडार भी 41.85 लाख टन से बढ़कर 57.44 लाख टन हो गया है. यह सभी संकेत बताते हैं कि उर्वरक भंडारण की स्थिति मजबूत है.

वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद तैयारी पुख्ता

सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय कदम उठाए हैं. लगभग 25 लाख टन यूरिया की व्यवस्था वैश्विक टेंडर के जरिए सुनिश्चित की गई है. साथ ही, घरेलू उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है, जिससे उर्वरक संयंत्रों में उत्पादन निर्बाध जारी है.

किसानों को सब्सिडी का बड़ा सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 4,000 रुपये प्रति बोरी से ऊपर पहुंच चुकी है, लेकिन भारत में किसानों को 45 किलोग्राम की बोरी मात्र 266.5 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है. यह भारी सब्सिडी किसानों को वैश्विक कीमतों के असर से बचाने में मदद कर रही है.

कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती

सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और गलत सूचनाओं के प्रसार पर सख्त कार्रवाई की जाए. उद्देश्य यह है कि खाद समय पर और समान रूप से सभी किसानों तक पहुंचे.

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