सुप्रीम कोर्ट में कागज फेंकने और गाली देने वाले पर नहीं होगी कार्रवाई... CJI ने क्यों लिया यह फैसला?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा करने वाले एक याचिकाकर्ता के खिलाफ अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने या आगे कोई कदम उठाने से इनकार कर दिया है.

No action will be taken against the person who threw papers in the Supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा करने वाले एक याचिकाकर्ता के खिलाफ अब कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने या आगे कोई कदम उठाने से इनकार कर दिया है.

दरअसल, एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने केस की फाइल के कागज हवा में फेंक दिए थे और गाली-गलौज भी की थी. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने उसे तुरंत कोर्टरूम से बाहर निकाल दिया था.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार की तरफ से याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती थी, लेकिन CJI सूर्यकांत ने ऐसा नहीं करने का फैसला लिया.

सस्ती लोकप्रियता के लिए होती हैं ऐसी घटनाएं

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि कई बार लोग ऐसी हरकतें सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए करते हैं. अगर उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाती है तो उनका मकसद पूरा हो सकता है.

जब सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार ने इस घटना की जानकारी CJI सूर्यकांत को दी तो उन्होंने मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने किया हंगामा

यह घटना शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हुई. उस समय जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत उस समय कोर्टरूम में मौजूद नहीं थे.

याचिकाकर्ता खुद अपना केस लड़ रहा था और उसके साथ कोई वकील नहीं था. सुनवाई के दौरान उसने खुद को "संप्रभु" बताया और अचानक अपनी केस फाइल के कागज हवा में उछाल दिए.

उसकी इस हरकत से कोर्टरूम में कुछ समय के लिए माहौल बिगड़ गया. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उसे पकड़कर कोर्टरूम से बाहर कर दिया.

याचिकाकर्ता ने जज को ही दिया आदेश

सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने कहा, "मैं लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देता हूं."

इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा, "क्या आप मुझे आदेश दे रहे हैं?"

इसके बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी तरफ से इतना ही है और सब कुछ रिकॉर्ड में है. इसके बाद उसने केस की फाइल फेंक दी और गाली-गलौज करने लगा.

सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली और उसे कोर्टरूम से बाहर ले गए. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है.

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