दवाओं की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने मरीजों को राहत देने वाला कदम उठाया है. नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 39 नई दवाओं की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) निर्धारित कर दी है. यह फैसला ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) 2013 के तहत लिया गया है. NPPA की ओर से जारी किए गए नए नोटिफिकेशन के बाद अब दवा कंपनियां इन दवाओं को तय सीमा से ज्यादा कीमत पर नहीं बेच पाएंगी. सरकार का यह कदम जरूरी दवाओं को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखने और मरीजों पर बढ़ते इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
डायबिटीज से लेकर कैंसर तक की दवाएं शामिल
सरकार ने जिन 39 दवाओं की कीमत तय की है, उनमें कई गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मेडिसिन शामिल हैं. इस सूची में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, संक्रमण, आंखों की बीमारी, सांस संबंधी समस्याओं और कैंसर जैसी बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं. नई कीमतों के दायरे में टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन, विटामिन D3 ओरल सॉल्यूशन, इमैटिनिब ओरल सॉल्यूशन, एम्पाग्लिफ्लोजिन आधारित कॉम्बिनेशन दवाएं, टेल्मिसार्टन कॉम्बिनेशन मेडिसिन, एस्पिरिन और एटोरवास्टेटिन वाले कैप्सूल समेत कई अन्य जरूरी दवाएं शामिल हैं.
दवा कंपनियों को देना होगा नई कीमतों का ब्योरा
NPPA के आदेश के मुताबिक, सभी दवा कंपनियों को अब नई तय कीमतों की जानकारी अपने डीलरों, वितरकों और संबंधित राज्यों के ड्रग कंट्रोल अधिकारियों को देनी होगी. इसके साथ ही कंपनियों को अपडेटेड प्राइस लिस्ट भी जारी करनी होगी. इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवा दुकानों और अस्पतालों तक सही कीमत की जानकारी पहुंचे, जिससे मरीजों से ज्यादा पैसे वसूले जाने की संभावना कम हो सके.
GST के नाम पर नहीं बढ़ा सकेंगी मनमाने दाम
सरकार ने दवाओं की कीमतों को लेकर GST नियमों को भी स्पष्ट किया है. नए आदेश में कहा गया है कि कंपनियां दवा की कीमत में GST तभी जोड़ सकती हैं, जब वह वास्तव में सरकार को भुगतान किया गया हो या भुगतान किया जाना तय हो. दवा कंपनियां केवल GST के नाम पर अतिरिक्त पैसा जोड़कर मरीजों पर आर्थिक बोझ नहीं डाल सकतीं. NPPA ने साफ कर दिया है कि कीमत बढ़ाने के लिए टैक्स का गलत इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा.
ज्यादा कीमत वसूलने पर होगी सख्त कार्रवाई
NPPA ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी तय अधिकतम कीमत से ज्यादा दाम पर दवा बेचती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ऐसी स्थिति में कंपनी को अतिरिक्त वसूली गई रकम ब्याज के साथ वापस करनी होगी. यह कार्रवाई ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर और एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत की जाएगी. सरकार ने साफ किया है कि मरीजों के हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है और जरूरी दवाओं की कीमतों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी.
मरीजों को राहत पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता
दवाओं की कीमतों में नियंत्रण का सीधा फायदा उन मरीजों को मिलेगा जो लंबे समय से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए नियमित दवाओं पर निर्भर हैं. डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों में लगातार दवाओं का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है. सरकार का मानना है कि कीमतों पर नियंत्रण से जरूरी दवाएं कम खर्च में उपलब्ध हो सकेंगी और स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों के लिए अधिक किफायती बनाया जा सकेगा.
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