'बधाई हो बधाई' की गूंज! नुक्कड़ नाटक से लाखों लोगों तक कैसे पहुंची पीएम सूर्य घर योजना?

PM Surya Ghar Yojana: भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की यात्रा को गति देने के एक बड़े प्रयास के तहत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 'नुक्कड़ नाटक' (भारत की पारंपरिक सड़क रंगमंच शैली) के माध्यम से एक बहु-राज्य जनसंपर्क अभियान शुरू किया.

PM Surya Ghar Yojana reached lakhs of people through street plays
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

PM Surya Ghar Yojana: भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की यात्रा को गति देने के एक बड़े प्रयास के तहत, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 'नुक्कड़ नाटक' (भारत की पारंपरिक सड़क रंगमंच शैली) के माध्यम से एक बहु-राज्य जनसंपर्क अभियान शुरू किया. जून 2026 में 12 राज्यों में शुरू किए गए इस अभियान का नाम "बधाई हो बधाई" रखा गया. इसका उद्देश्य पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के लाभों को सीधे हजारों परिवारों के दरवाजे तक पहुंचाना था, ताकि एक तकनीकी नीति को एक ऐसी कहानी में बदला जा सके जिसे लोग हंसते हुए सुन सकें, आपस में चर्चा कर सकें और याद रख सकें.

हर प्रस्तुति के केंद्र में एक सीधा-सरल, आम इंसान का किरदार था एक ऐसा आम आदमी जिसे एक दिन अपना बिजली का बिल मिलता है और उस पर 'शून्य' (जीरो) लिखा होता है. उसकी हैरानी और खुशी देखकर पड़ोसियों के बीच उत्सुकता और हंसी-मजाक से भरी बातचीत शुरू हो जाती है, जो यह जानना चाहते हैं कि आखिर यह कैसे और क्यों हुआ. इन संवादों के माध्यम से, दर्शकों ने रूफटॉप सोलर (छत पर सौर ऊर्जा) लगाने के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता और सब्सिडी के विवरण को आसानी से समझ लिया. उन्होंने इसे किसी पर्चे पर लिखी नीति की तरह नहीं, बल्कि अपने ही पड़ोस में घटती एक कहानी की तरह देखा. इसी नुक्कड़ नाटक प्रारूप की बदौलत यह अभियान गांवों के चौपालों से लेकर शहरों के चौकों तक पहुंच गया और एक सरकारी योजना को समुदाय की वास्तविक चर्चा का हिस्सा बना दिया. परदे के पीछे, यह अभियान अपनी पटकथा के साथ-साथ बदलाव की क्षमता पर भी निर्भर था. 

टीमों ने शुरुआत में चार रूट तय किए थे, लेकिन, कलाकारों ने मौसम और मौके पर भीड़ की स्थिति को देखते हुए वास्तविक समय में अपने दैनिक कार्यक्रम में बदलाव किए. इस के कारण वे व्यस्त दिनों में रोजाना चार-चार प्रस्तुतियां देने में सफल रहे. जब यह दौरा समाप्त हुआ, तब तक इस अभियान ने बिना किसी रुकावट के प्रमुख क्षेत्रीय केंद्रों और जमीनी स्तर के समुदायों में 205 प्रस्तुतियां दीं.

जमीनी स्तर पर मिली प्रतिक्रिया अपने आप में एक कहानी बयां करती है. उत्तर प्रदेश दर्शकों की संख्या और डिजिटल उत्सुकता दोनों मामलों में सबसे आगे रहा 9 जिलों में 13 दिनों के दौरे के दौरान 39 प्रस्तुतियां हुईं, जिससे 3,910 से अधिक नागरिक जुड़े और 2,025 से अधिक QR कोड स्कैन दर्ज किए गए, क्योंकि दर्शकों ने अधिक जानकारी के लिए अपने फोन का उपयोग किया. महाराष्ट्र इसके ठीक पीछे रहा, जिसने 9 जिलों के दौरे में 2,430 से अधिक नागरिकों से संपर्क साधा और 1,600 QR स्कैन दर्ज किए.

वहीं मध्य प्रदेश के 5 जिलों के दौरे ने 1,790 नागरिकों तक पहुंच बनाई और 880 QR स्कैन दर्ज किए, जबकि बिहार ने 6 जिलों में 1,735 नागरिकों को जोड़ा और 860 स्कैन दर्ज किए. ओडिशा और राजस्थान दोनों ने अपने यहां 6-6 जिलों का दौरा किया; ओडिशा में 1,600 नागरिक और 730 QR स्कैन दर्ज हुए, जबकि राजस्थान में 1,525 नागरिक और 665 स्कैन दर्ज किए गए. पश्चिम बंगाल की 6 जिलों की प्रस्तुतियों ने 1,380 नागरिकों को जोड़ा और 640 डिजिटल स्कैन हासिल किए.

दक्षिण भारत और देश के बड़े शहरों में भी यह रफ्तार बनी रही. आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु ने 6-6 जिलों को कवर किया, जिसमें आंध्र प्रदेश ने 1,030 नागरिकों और तमिलनाडु ने 990 नागरिकों तक पहुंच बनाई. इन दोनों राज्यों ने मिलकर लगभग 960 QR स्कैन का योगदान दिया. देश की राजधानी दिल्ली के 3 प्रशासनिक जिलों में हुई प्रस्तुतियों ने 990 शहरी नागरिकों को जोड़ा और इसके जरिए 525 QR स्कैन हुए. गुजरात के 5 जिलों के अभियान ने 940 नागरिकों से संपर्क साधा, और छत्तीसगढ़ ने रायपुर व कोरबा जैसे उभरते शहरी केंद्रों में इस योजना का संदेश पहुंचाया, जहां 540 नागरिकों को जोड़ा गया और 250 QR स्कैन हुए.

जब इस सांस्कृतिक रूप से जुड़े दौरे का समापन हुआ, तब तक "बधाई हो बधाई" अभियान ने एक सरकारी योजना को पड़ोस के स्तर पर साझा करने योग्य कहानी बना दिया था. मनोरंजन के माध्यम से नीति और जनता के बीच की दूरी को पाटकर, इस अभियान ने लाखों भारतीय परिवारों को रूफटॉप सोलर पर विचार करने का एक ठोस कारण दिया इसे किसी दूर की योजना के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी चीज़ के रूप में दिखाया जिसे उनके बगल वाले पड़ोसी ने पहले ही आज़मा लिया है, और गवाही के लिए उसके पास 'शून्य' बिजली का बिल भी है.

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के जागरूकता अभियान ने देश भर में एक बेहद सफल आउटरीच (जनसंपर्क) का प्रदर्शन किया है, जिसने पारंपरिक जमीनी कला को डिजिटल जुड़ाव के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा. 12 राज्यों और 69 जिलों में फैले इस अभियान ने सीधे तौर पर 18,920 से अधिक नागरिकों से संपर्क साधा, जनता में भारी दिलचस्पी जगाई, और योजना के लिए 9,596 से अधिक QR स्कैन दर्ज किए.

उत्तर प्रदेश अपनी 39 लक्षित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुतियों के माध्यम से सबसे अधिक जनसंपर्क करने वाला शीर्ष राज्य बनकर उभरा, जबकि महाराष्ट्र ने बेहतरीन डिजिटल जुड़ाव के साथ दूसरा स्थान हासिल किया. अंततः, विभिन्न शहरी और उभरते क्षेत्रों में इस मजबूत भागीदारी ने पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना को अपनाने के लिए जनता की तेजी से बढ़ती रुचि और तत्परता को उजागर किया है.

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