Firozabad Aarav Murder Case: कुछ अपराध ऐसे होते हैं, जिनमें केवल कानून नहीं, बल्कि इंसानियत भी कटघरे में खड़ी नजर आती है. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद में डेढ़ वर्षीय मासूम आरव की हत्या ऐसा ही मामला था, जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया. एक ऐसे बच्चे की बेरहमी से जान ले ली गई, जिसने अभी दुनिया को ठीक से समझना भी शुरू नहीं किया था. इस जघन्य वारदात के पीछे वजह थी एकतरफा प्यार, जिसे ठुकराए जाने का बदला आरोपी ने एक मासूम की हत्या कर लेकर लिया. अब इस बहुचर्चित मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को फांसी की सजा सुनाई है. अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
एकतरफा प्यार ने ले लिया हैवानियत का रूप
मामले की शुरुआत रति देवी के वैवाहिक जीवन से हुई. वर्ष 2024 में उनकी शादी बदायूं निवासी सुमित कुमार से हुई थी, लेकिन वैवाहिक विवादों के चलते वह अपने डेढ़ वर्षीय बेटे आरव के साथ पिछले कई महीनों से फिरोजाबाद के अरांव स्थित मायके में रह रही थीं.
इसी दौरान सुमित का रिश्तेदार जितेंद्र पाठक रति के संपर्क में आया. शुरुआत में उसने मदद और सहानुभूति का भरोसा दिया, लेकिन धीरे-धीरे वह रति के करीब आने की कोशिश करने लगा. कुछ समय बाद उसने शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे रति ने साफ तौर पर अस्वीकार कर दिया. पुलिस जांच के अनुसार, यही इनकार आरोपी के भीतर बदले की आग बन गया और उसने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
टॉफी का बहाना और 27 सेकंड में उजड़ गया परिवार
30 मई को रति देवी अपनी मां के साथ एक कानूनी मामले में सलाह लेने शिकोहाबाद गई थीं. उनके साथ डेढ़ वर्षीय आरव भी था. आरोप है कि इसी दौरान जितेंद्र वहां पहुंचा और बच्चे को टॉफी दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले गया.
कुछ ही दूरी पर सुनसान जगह पर उसने मासूम आरव को बेरहमी से सड़क पर बार-बार पटका. जांच में सामने आया कि महज 27 सेकंड के भीतर उसने बच्चे को आठ बार जमीन पर पटक दिया. गंभीर सिर की चोटों के कारण मासूम की मौके पर ही मौत हो गई. वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी शव को रति के घर के बाहर छोड़कर फरार हो गया. इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया.
तेज जांच ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच में असाधारण तेजी दिखाई. घटना के बाद सभी तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटाए गए. पुलिस ने केवल छह दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जो इस तरह के मामलों में बेहद तेज कार्रवाई मानी जाती है. अभियोजन पक्ष ने अदालत में 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से केवल एक गवाह पेश किया गया. सरकारी अधिवक्ता ने अदालत के सामने सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिन्हें अदालत ने विश्वसनीय माना.
महज 40 दिनों में पूरी हुई सुनवाई
इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई भी तेजी से पूरी की गई. वारदात के करीब 40 दिनों के भीतर जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा. गुरुवार को अदालत ने जितेंद्र पाठक को हत्या सहित अन्य धाराओं में दोषी करार दिया. इसके अगले दिन सजा पर सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने अपराध की क्रूरता, मासूम की उम्र और आरोपी के इरादे को देखते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई.
फैसला सुनते ही टूट गया दोषी
सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया. जैसे ही न्यायाधीश ने फांसी की सजा सुनाई, आरोपी जितेंद्र पाठक भावुक हो गया. अदालत में मौजूद लोगों के सामने वह खुद को थप्पड़ मारने लगा. हालांकि अदालत ने साफ कहा कि यह अपराध अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला है, इसलिए यह मामला "रेयरेस्ट ऑफ रेयर" श्रेणी में आता है.
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