क्‍या है Gen Z 212 आंदोलन? नेपाल के बाद मोरक्को में हिंसक प्रदर्शन; पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर चला दी गोलियां

मोरक्को में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं. देश के कई हिस्सों में लगातार पांच दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हालात बेकाबू हो गए हैं. तटीय शहर अगादिर के बाहरी इलाके में पुलिस की गोलीबारी में तीन युवकों की मौत हो गई, जिसके बाद देशभर में गुस्से की लहर दौड़ गई है.

Morroco Protest Gen Z Turns Violent killed three people
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मोरक्को में सरकार विरोधी प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुके हैं. देश के कई हिस्सों में लगातार पांच दिनों से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हालात बेकाबू हो गए हैं. तटीय शहर अगादिर के बाहरी इलाके में पुलिस की गोलीबारी में तीन युवकों की मौत हो गई, जिसके बाद देशभर में गुस्से की लहर दौड़ गई है.

सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों से संवाद की पेशकश की गई है, लेकिन जमीनी हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री अजीज अखन्नौच की सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है.

युवाओं के गुस्से की जड़: भ्रष्टाचार और विश्व कप की तैयारियां

इस बार विरोध का चेहरा Gen Z (जनरेशन Z) बनकर उभरा है. यानी वो युवा वर्ग जो इंटरनेट के साथ बड़ा हुआ और जिसे सामाजिक मुद्दों को लेकर बेबाकी से बोलने की आदत है. प्रदर्शन में शामिल अधिकांश युवा सरकारी भ्रष्टाचार और खर्चों की प्राथमिकता को लेकर नाराज हैं. प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि अगर देश के अस्पताल और स्कूल फंड की कमी से जूझ रहे हैं, तो सरकार 2030 फुटबॉल विश्व कप की तैयारियों के नाम पर अरबों डॉलर क्यों बहा रही है?

सोशल मीडिया से सड़कों तक

इन प्रदर्शनों की शुरुआत इंटरनेट से हुई. सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता को लेकर नाराजगी फैलने लगी और धीरे-धीरे यह आक्रोश सड़कों पर उतर आया. राजधानी रबात, कैसाब्लांका, माराक़ेश और अन्य शहरों में हुए प्रदर्शनों ने हाल ही में नेपाल में हुए जनांदोलनों की याद दिला दी, जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म से शुरू हुई मुहिम ने सड़कों पर एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया था.

हिंसा में तब्दील हुआ आंदोलन, पुलिस की गोली से तीन की जान गई

सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, लेकलिया कस्बे में जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के हथियार छीनने की कोशिश की, तो जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाकर्मियों ने गोलियां चलाईं, जिसमें तीन युवाओं की मौत हो गई. गृह मंत्रालय के अनुसार 354 सुरक्षाकर्मी घायल हुए, 23 प्रांतों में हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं, सैकड़ों दुकानें, बैंक, कारें और सार्वजनिक इमारतें क्षतिग्रस्त, प्रदर्शनकारियों में से 70% नाबालिग, प्रधानमंत्री की सफाई और समाधान की पेशकश, प्रधानमंत्री अखन्नौच ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा: “हम तीन युवाओं की मौत से बेहद दुखी हैं. हमारी सरकार प्रदर्शनकारियों की शिकायतों को गंभीरता से ले रही है और समाधान के लिए संवाद को तैयार है.”उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार उनकी प्राथमिकता है, और हर मुद्दे का हल बातचीत से ही निकाला जाएगा.

क्या संकट में है सरकार?

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह प्रदर्शन युवाओं के नेतृत्व में तेज़ी से फैल रहे हैं, उससे सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. लोग इसे नेपाल जैसी स्थिति की आहट मान रहे हैं, जहां युवाओं ने सत्ता की दिशा बदल दी थी.

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