ईरान पर नहीं हुआ अमेरिकी हमलों का असर! अंडरग्राउंड ठिकानों में बनने लगीं मिसाइलें, लंबी जंग की तैयारी?

अमेरिका और इजरायल ने ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने के लिए उसके ठिकानों पर हमले किए, लेकिन तेहरान को पूरी तरह झुकाने में सफल नहीं हुए.

Missile production resumes at Irans underground sites following US strikes
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Iran Missile Production: अमेरिका और इजरायल ने ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करने के लिए उसके ठिकानों पर हमले किए, लेकिन तेहरान को पूरी तरह झुकाने में सफल नहीं हुए. अब ईरान फिर से अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में जुट गया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, महीनों की अमेरिकी और इजरायली कार्रवाई के बावजूद ईरान ने अंडरग्राउंड ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन फिर शुरू कर दिया है. अमेरिकी और मध्य-पूर्वी अधिकारियों के अनुसार, ईरान पुराने भंडार में मौजूद पुर्जों का इस्तेमाल कर मिसाइलें बना रहा है. इनमें ठोस और तरल ईंधन वाली बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं. हालांकि, उत्पादन अभी युद्ध से पहले के स्तर तक नहीं पहुंचा है.

अंडरग्राउंड ठिकानों को फिर तैयार कर रहा ईरान

कई महीनों तक चले संघर्ष में ईरान के मिसाइल ढांचे को भारी नुकसान हुआ था. इसके बावजूद तेहरान अब कुछ ठिकानों को दोबारा सक्रिय करने में लगा है. रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के पूर्व में स्थित खौजर कॉम्प्लेक्स में मिसाइल से जुड़ी गतिविधियां फिर शुरू हो गई हैं. ईरान पुराने ठिकानों को ही दोबारा शुरू नहीं कर रहा, बल्कि नई अंडरग्राउंड फैसिलिटीज भी तैयार कर रहा है. इन जगहों पर मिसाइलों का उत्पादन किया जा सकेगा और हवाई हमलों में इन्हें निशाना बनाना भी मुश्किल होगा.

ट्रंप के दावे को मिली नई चुनौती

ईरान की यह कोशिश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के लिए चुनौती बन सकती है, जिसमें वह कहते रहे हैं कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को बुरी तरह कमजोर कर दिया है. ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद युद्ध खत्म हो जाएगा. उनका कहना था कि ईरान अमेरिकी दबाव को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाएगा.

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन के कुछ बड़े सलाहकार इससे अलग राय रखते हैं. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कथित तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य और आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान अपना प्रतिरोध जारी रख सकता है.

2029 तक खिंच सकती है जंग?

अमेरिकी प्रशासन में इस संभावना पर भी चर्चा है कि संघर्ष ट्रंप के मौजूदा राष्ट्रपति कार्यकाल के बाकी समय तक चल सकता है. यानी लड़ाई जनवरी 2029 तक खिंचने की आशंका भी जताई जा रही है. ऐसे में ईरान का मिसाइल उत्पादन दोबारा शुरू करना अहम माना जा रहा है.

इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान ने अपनी पुरानी सैन्य ताकत पूरी तरह वापस हासिल कर ली है. हालांकि, तेहरान अपनी मिसाइल क्षमता को फिर से खड़ा करने की दिशा में जरूर बढ़ रहा है. इसका असर अमेरिका की युद्ध रणनीति और ट्रंप के उस दावे पर पड़ सकता है कि ईरान की सैन्य ताकत निर्णायक रूप से तबाह हो चुकी है.

लंबी चलने वाली जंग का असर तेल और ईंधन की कीमतों पर भी पड़ सकता है. इससे नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी पर राजनीतिक दबाव बढ़ने की आशंका है.

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