'हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं...' पाकिस्तान ने सऊदी अरब को दिया धोखा! टूट जाएगा मक्का पैक्ट?

एक दिन पहले तक सऊदी अरब पर हूती हमले के जवाब में कार्रवाई की बात कर रहे पाकिस्तान के सुर अब बदल गए हैं. इस्लामाबाद ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए मक्का रक्षा समझौते को रक्षात्मक गठबंधन बताया है.

Pakistan Refuses To Attack Houthis Mecca Pact with Saudi Arabia
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इस्लामाबाद: एक दिन पहले तक सऊदी अरब पर हूती हमले के जवाब में कार्रवाई की बात कर रहे पाकिस्तान के सुर अब बदल गए हैं. इस्लामाबाद ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ हुए मक्का रक्षा समझौते को रक्षात्मक गठबंधन बताया है. पाकिस्तान ने कहा है कि फिलहाल समझौते में किसी दूसरे देश को शामिल करने की कोई योजना नहीं है और हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का भी कोई इरादा नहीं है. पाकिस्तान के इस रुख को सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और मक्का रक्षा समझौते को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.

हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर कोई चर्चा नहीं

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी. उनसे पूछा गया था कि सऊदी अरब पर हूती हमले के बाद पाकिस्तान समझौते के तहत अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाएगा. प्रवक्ता ने कहा कि समझौते का मकसद सदस्य देशों की सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है. उन्होंने साफ किया कि हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं चल रही है. पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ रक्षा और सुरक्षा मामलों में संपर्क बनाए हुए है, लेकिन समझौते को लागू होने में समय लगेगा और इसके अलग-अलग पहलू धीरे-धीरे सामने आएंगे.

यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और सऊदी अरब को हूती हमलों का सामना करना पड़ा है. ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठे. पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उनका देश समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा, लेकिन तत्काल जवाबी हमले की कोई योजना नहीं है.

पाकिस्तान ने समझौते को बताया रक्षात्मक

प्रवक्ता ने दोहराया कि मक्का रक्षा समझौता रक्षात्मक प्रकृति का है. तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला सभी पर हमला माना जाएगा, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सऊदी अरब से जुड़े हर सुरक्षा संकट में पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई करेगा. सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना पहले से प्रशिक्षण और रसद सहायता के लिए तैनात है. यह मौजूदगी पुराने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का हिस्सा है, जबकि नए समझौते को व्यापक ढांचे के रूप में देखा जा रहा है.

समझौते में दूसरे देशों को जोड़ने की योजना नहीं

मक्का समझौते को लेकर पहले से चर्चा रही है कि क्या इसका दायरा दूसरे मुस्लिम देशों तक बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, पाकिस्तान ने फिलहाल ऐसी किसी संभावना से इनकार किया है. उसने कहा कि समझौते के विस्तार की कोई योजना नहीं है. 7 अगस्त को इस्तांबुल में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच मक्का डिफेंस पैक्ट हुआ था. तीनों देशों ने समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए कहा था कि किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. सऊदी अरब पर हूती हमले के बाद पाकिस्तान ने भी कड़ी आपत्ति जताई थी.

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि मक्का समझौते को लेकर कोई अस्पष्टता या संदेह नहीं है. उन्होंने कहा था कि बिना उकसावे के हमला या सऊदी अरब तक हमले का विस्तार होने पर निश्चित तौर पर यह समझौता लागू होगा.