लखनऊ के अलीगंज में हुए दर्दनाक अग्निकांड के ठीक 32 दिन बाद प्रशासन ने उस अवैध इमारत के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी, जिसने 15 लोगों की जान ले ली थी. शनिवार सुबह लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की टीम भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ मौके पर पहुंची और चार मंजिला इमारत को गिराने का अभियान शुरू किया. कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके की घेराबंदी कर यातायात रोक दिया गया ताकि ध्वस्तीकरण सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके. प्रशासन का कहना है कि पूरी इमारत को हटाने में पूरे दिन का समय लग सकता है.
कार्रवाई के बीच मालिक पक्ष ने उठाए सवाल
ध्वस्तीकरण शुरू होते ही भवन मालिक की ओर से कानूनी आपत्ति भी सामने आई. मालिक के अधिवक्ता ने दावा किया कि एलडीए ने पहले 25 जुलाई तक का समय दिया था, लेकिन उसी दिन बिना किसी अलग ध्वस्तीकरण आदेश के कार्रवाई शुरू कर दी गई. उनका कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी. हालांकि एलडीए का पक्ष है कि तय समयसीमा समाप्त होने के बाद नियमों के तहत यह कार्रवाई की जा रही है.
#WATCH | Uttar Pradesh: Lucknow Development Authority (LDA) carries out demolition of the fire-ravaged building in Lucknow's Aliganj.
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) July 25, 2026
The bulldozer arrived just after the 15-day demolition deadline expired. The demolition process began after verifying the extent of demolition… pic.twitter.com/gLIwQd2Cqu
22 जून को हुआ था हादसा
22 जून को इसी इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित एनिमेशन कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग बाहर नहीं निकल सके. कुछ लोगों ने पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई, जबकि एक युवक दूसरी मंजिल से छलांग लगाने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया था. इस हादसे ने शहर में भवन सुरक्षा और फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे.
जांच में खुली नियमों की अनदेखी
हादसे के बाद हुई जांच में सामने आया कि जिस भवन को आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति मिली थी, उसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था. इतना ही नहीं, निर्माण भी स्वीकृत मानकों और भवन नियमों के विपरीत पाया गया. इसके बाद एलडीए ने भवन मालिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और 10 जुलाई को 15 दिनों के भीतर स्वयं इमारत गिराने का आदेश दिया. निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद जब भवन नहीं हटाया गया, तब प्राधिकरण ने खुद बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी.
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