LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है. तेल और प्राकृतिक गैस की वैश्विक सप्लाई प्रभावित होने से भारत में भी एलपीजी को लेकर चिंता बढ़ी है. हालांकि सरकार ने कहा है कि घरेलू उत्पादन बढ़ा है और घबराने की जरूरत नहीं है.
इसके बावजूद गैस सिलेंडर की कीमतों और रिफिल में देरी की खबरों के कारण कई लोग खाना बनाने के वैकल्पिक तरीकों की ओर देखने लगे हैं. इसी वजह से इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकटॉप की मांग तेजी से बढ़ी है.
महानगरों में बढ़ी इंडक्शन की मांग
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री अचानक बढ़ गई है. कई जगहों पर तो दुकानों में इंडक्शन आउट ऑफ स्टॉक होने लगे हैं.
ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या गैस की जगह इंडक्शन पर खाना बनाना ज्यादा सस्ता पड़ता है.
गैस स्टोव में कितनी ऊर्जा होती है बेकार
गैस स्टोव पर खाना बनाते समय काफी ऊर्जा बर्बाद हो जाती है. अनुमान के मुताबिक गैस से बनने वाली करीब 60 प्रतिशत गर्मी बर्तन के आसपास हवा में उड़ जाती है. इसका मतलब है कि गैस की कीमत का सिर्फ करीब 40 प्रतिशत हिस्सा ही खाना पकाने में उपयोग होता है.
इंडक्शन कैसे काम करता है
इंडक्शन कुकटॉप आधुनिक तकनीक पर काम करता है. इसमें कांच की सतह के नीचे लगे कॉइल और मैग्नेटिक फील्ड की मदद से बर्तन सीधे गर्म होता है.
इस प्रक्रिया में गर्मी सीधे बर्तन के अंदर पैदा होती है, इसलिए ऊर्जा की बर्बादी बहुत कम होती है. इसी कारण इंडक्शन की कार्यक्षमता करीब 90 प्रतिशत तक मानी जाती है.
हर महीने कितनी हो सकती है बचत
इस हिसाब से गैस की तुलना में करीब 300 रुपये प्रति महीने की बचत हो सकती है. जिन राज्यों में शुरुआती बिजली यूनिट मुफ्त या सस्ती हैं, वहां यह बचत और भी ज्यादा हो सकती है.
इंडक्शन में शुरुआती खर्च ज्यादा
इंडक्शन इस्तेमाल करने के लिए शुरुआत में कुछ खर्च करना पड़ता है. एक अच्छे इंडक्शन कुकटॉप की कीमत लगभग 2000 से 4000 रुपये तक होती है.
इसके अलावा फ्लैट बॉटम वाले स्टेनलेस स्टील या कास्ट आयरन के बर्तन भी खरीदने पड़ते हैं. हालांकि कम मासिक खर्च के कारण एक साल के भीतर यह शुरुआती खर्च आसानी से निकल सकता है.
इंडक्शन का एक फायदा यह भी है कि इससे रसोई ज्यादा गर्म नहीं होती और साफ-सफाई भी आसान रहती है.
होटल और रेस्टोरेंट के लिए क्यों मुश्किल
घरेलू इस्तेमाल में इंडक्शन सस्ता विकल्प हो सकता है, लेकिन रेस्टोरेंट और होटल के लिए इसे अपनाना आसान नहीं है.
इसके अलावा बिजली कटौती होने पर बैकअप की जरूरत भी एक बड़ी समस्या बन जाती है. यही कारण है कि आज भी ज्यादातर व्यावसायिक रसोई में एलपीजी का इस्तेमाल ही ज्यादा किया जाता है.
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