Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार ने माझी लाडकी बहिन योजना में अपात्र लाभार्थियों के मामले उजागर होने के बाद योजना के पुनर्सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब लाभार्थी बहनों का आधार कार्ड के जरिए ई-केवाईसी के माध्यम से सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि योजना का लाभ सही हकदारों तक पहुंच सके.
दो महीने के भीतर करें सत्यापन
महिला एवं बाल विकास विभाग ने जारी किए गए आदेश में कहा है कि चालू वित्त वर्ष में 18 सितंबर से पात्र लाभार्थियों का दो महीने के भीतर सत्यापन और प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा. जो लोग इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करेंगे, उनके खिलाफ विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा. योजना के तहत लगभग 26 लाख लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार भी शामिल हैं. सरकार इन सभी के खिलाफ सख्ती बरतने के मूड में है.
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के परिवारों में मिली गड़बड़ी
सत्यापन में यह बात सामने आई है कि कई सरकारी अधिकारी और कर्मचारी, जिनके परिवार योजना के लाभार्थी बने हुए थे, वास्तव में पात्र नहीं थे. ऐसे मामलों में सरकार ने प्रारंभिक दौर में अधिकारियों से स्वयं ही योजना से बाहर निकलने का आग्रह किया, लेकिन अब कार्रवाई की सख्ती बढ़ा दी गई है.
विधानसभा चुनाव में लाडकी बहिन योजना का असर
यह योजना विधानसभा चुनावों में महायुति के लिए एक महत्वपूर्ण गेमचेंजर साबित हुई थी और पार्टी को भारी बहुमत दिलाने में सहायक रही. हालांकि, अब सरकार को योजना के वित्तीय प्रावधानों में कड़ाई दिखानी पड़ रही है ताकि दुरुपयोग पर अंकुश लग सके. सामाजिक न्याय और आदिवासी विभाग में धन के दुरुपयोग को लेकर विवाद भी इस फैसले में अहम भूमिका निभा रहा है.
केंद्र और राज्य की योजनाओं में समन्वय
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी लाभार्थी केंद्र और राज्य दोनों योजनाओं का लाभ एक साथ नहीं ले सकेगा. इस दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं और जो लोग दोनों योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, उन्हें ‘लाडकी बहिन योजना’ से बाहर किया जाएगा. सामाजिक न्याय मंत्री विजय वडेट्टीवार ने इस पर कड़ा रुख दिखाया है.
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