तकनीक आज जिस तेज़ी से हमारी ज़िंदगी में घुलती जा रही है, उसने अब घर के सबसे निजी स्थान — टॉयलेट — को भी हेल्थ मॉनिटरिंग का सेंटर बना दिया है. अमेरिका की जानी-मानी सैनिटरी कंपनी कोहलर ने एक अनोखा डिवाइस लॉन्च किया है, जो दिखने में तो एक छोटा कैमरा है, लेकिन इसका मकसद आपकी सेहत की निगरानी करना है, न कि निजता में दखल देना.
कोहलर ने हाल ही में अपना नया हेल्थ ब्रांड ‘Kohler Health’ लॉन्च किया है और इसी के तहत कंपनी ने पहला प्रोडक्ट ‘डेकोडा’ बाजार में उतारा है. यह डिवाइस टॉयलेट सीट के किनारे पर फिट किया जा सकता है और टॉयलेट इस्तेमाल करते वक्त यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाता है.
कैसे काम करता है डेकोडा डिवाइस?
डेकोडा को खासतौर पर टॉयलेट के अंदर की सतह को स्कैन करने के लिए बनाया गया है. जब व्यक्ति इसका उपयोग करता है, तो डिवाइस में लगे ऑप्टिकल सेंसर मल की तस्वीरें लेते हैं और उनका विश्लेषण करते हैं. इस प्रक्रिया के जरिए यह डिवाइस यह बता सकता है कि आंतें ठीक से काम कर रही हैं या नहीं, शरीर में पानी की कमी तो नहीं हो रही, या मल में खून जैसी कोई चिंता की बात तो नहीं दिख रही.
फिंगरप्रिंट से होती है पहचान, ऐप में मिलती है पूरी रिपोर्ट
इस डिवाइस को हर यूजर के साथ जोड़ने के लिए इसमें फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है. जब कोई व्यक्ति टॉयलेट सीट इस्तेमाल करता है, तो उससे पहले उसे उंगली से साइन इन करना होता है. इससे पता चलता है कि किसने इसका उपयोग किया. उसके बाद, एक मोबाइल ऐप पर उस व्यक्ति की हेल्थ रिपोर्ट उपलब्ध होती है, जिसमें दिनभर के पानी के सेवन से लेकर आंतों की गतिविधियों तक की जानकारी होती है.
कीमत और सब्सक्रिप्शन प्लान्स की जानकारी
डेकोडा की कीमत 599 अमेरिकी डॉलर रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 50,000 रुपये बैठती है. इसके साथ ही यूजर को एक सालाना सब्सक्रिप्शन प्लान भी लेना होता है, जिसकी कीमत 70 डॉलर से 156 डॉलर (लगभग ₹6,000–13,000) के बीच होती है. प्लान का चयन इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी विस्तृत जानकारी चाहते हैं.
गहरे रंग के टॉयलेट में नहीं करता बेहतर काम
एक बात जो ध्यान देने लायक है, वो यह कि डेकोडा डार्क कलर या काले रंग के टॉयलेट्स में अच्छी तरह काम नहीं करता. कंपनी की मानें तो यह डिवाइस हल्के रंग के वॉशरूम्स में बेहतर रिजल्ट देता है, क्योंकि कैमरा सेंसर की विजिबिलिटी वहां अधिक होती है.
प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई
जैसे ही यह खबर सामने आई कि एक कैमरा टॉयलेट में लगाया जा रहा है, लोगों के मन में निजता के उल्लंघन को लेकर सवाल उठने लगे. लेकिन कोहलर कंपनी ने इस चिंता को गंभीरता से लेते हुए भरोसा दिलाया है कि डेकोडा में इस्तेमाल की गई तकनीक पूरी तरह सुरक्षित है. कंपनी का दावा है कि कैमरा सिर्फ टॉयलेट के अंदर की सतह तक सीमित रहता है और वह किसी भी व्यक्ति के चेहरे या शरीर की अन्य जानकारी को कैप्चर नहीं करता. साथ ही, यूजर डेटा को एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के जरिए सुरक्षित रखा गया है और इसकी एक्सेस सिर्फ उसी व्यक्ति को मिलती है जिसका फिंगरप्रिंट रजिस्टर्ड है.
भविष्य की हेल्थ मॉनिटरिंग अब बाथरूम तक पहुंची
डेकोडा को लेकर भले ही पहली प्रतिक्रिया मिलीजुली हो, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह डिवाइस हेल्थ टेक्नोलॉजी के भविष्य की झलक देता है. घर बैठे, रोजमर्रा की एक सामान्य प्रक्रिया के जरिए शरीर की गंभीर बीमारियों का संकेत मिलना, मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ा कदम है. यह डिवाइस हमें दिखाता है कि कैसे तकनीक अब सिर्फ हमारी जिंदगी को आसान नहीं, बल्कि स्वस्थ बनाने के लिए भी काम कर रही है.
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