झारखंड में नक्सलवाद को बड़ा झटका! 24 घंटे में 34 नक्सलियों ने डाले हथियार, ‘सरेंडर स्ट्राइक’ का दिखा असर

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है. लंबे समय तक जंगलों में सक्रिय रहे प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 16 सदस्यों ने अब हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का फैसला किया है.

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झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है. लंबे समय तक जंगलों में सक्रिय रहे प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 16 सदस्यों ने अब हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का फैसला किया है. रांची स्थित झारखंड पुलिस मुख्यालय में हुए इस सामूहिक आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां राज्य में शांति बहाल करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि मान रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि लगातार चल रहे अभियानों और पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन के कई सदस्य अब मुख्यधारा में लौटने का निर्णय ले रहे हैं.

अत्याधुनिक हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटे नक्सली

आत्मसमर्पण करने वालों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं, जिन्होंने पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हथियार डाले. सुरक्षा बलों के सामने जमा कराए गए हथियारों में AK-47, इंसास, HK-33, M-16 और यूएस कार्बाइन जैसी आधुनिक राइफलें शामिल हैं. इसके अलावा 38 मैगजीन और 1,562 राउंड कारतूस भी जमा कराए गए, जो यह दर्शाते हैं कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली संगठन के सक्रिय और सशस्त्र सदस्य थे.

इनामी और वांछित नक्सलियों ने भी छोड़ा संगठन

सरेंडर करने वालों में कई बड़े और लंबे समय से वांछित नक्सली शामिल हैं. इनमें 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ गांधी, 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा, संतोष मांझी, जयकांत मुंडा, अनिल तुरी, राजनाथ हांसदा और सुखलाल बिरजिया जैसे नाम प्रमुख हैं. इन पर कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से इनकी तलाश कर रही थीं.

पुनर्वास नीति का दिखने लगा असर

झारखंड पुलिस का मानना है कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों का सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगा है. अधिकारियों के मुताबिक, जंगलों में सक्रिय नक्सलियों से लगातार संपर्क स्थापित कर उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़ने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसी रणनीति के कारण कई नक्सली हथियार छोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं.

पहले भी बन चुका है सामूहिक आत्मसमर्पण का रिकॉर्ड

आईजी (ऑपरेशन) नरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि इससे पहले 21 मई 2026 को झारखंड के इतिहास में पहली बार 27 नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया था. उसके बाद भी कई बड़े नक्सली या तो गिरफ्तार हुए या फिर उन्होंने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया. पुलिस का कहना है कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और जो लोग हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं, उन्हें सरकार की पुनर्वास योजनाओं का पूरा लाभ दिया जाएगा.

नक्सल अभियान रहेगा जारी, बाकी उग्रवादियों से भी अपील

हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है कि राज्य में अब सीमित संख्या में ही सक्रिय नक्सली बचे हैं, लेकिन पुलिस का कहना है कि अभियान पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जो लोग कानून का रास्ता अपनाएंगे उनका स्वागत किया जाएगा, जबकि हिंसा और अवैध गतिविधियों में शामिल रहने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पहले की तरह जारी रहेगी. इस आत्मसमर्पण को झारखंड में नक्सलवाद के प्रभाव को कमजोर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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