राफेल से टकराएगा J-10C! अमेरिका के पड़ोसी पर डोरे डाल रहा चीन, डींगें हांकते रहेंगे ट्रंप; खेला करेगा ड्रैगन!

चीन अब सिर्फ एशिया या अफ्रीका तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह लैटिन अमेरिका में भी अपनी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने में जुट गया है.

J-10C clash with Rafale China woo America Trump
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

चीन अब सिर्फ एशिया या अफ्रीका तक ही सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह लैटिन अमेरिका में भी अपनी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने में जुट गया है. इसका ताजा उदाहरण है कोलंबिया को जे-10सी फाइटर जेट्स का ऑफर देना. यह वही कोलंबिया है, जिसे अमेरिका दशकों से अपना सहयोगी मानता रहा है, लेकिन अब चीन की आक्रामक कूटनीति और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के ज़रिए वह अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देने की ओर बढ़ रहा है.

हाल ही में कोलंबिया ने चीन के BRI में शामिल होने के लिए दस्तखत किए, जिससे वह इस वैश्विक परियोजना में कदम रखने वाला 23वां लैटिन अमेरिकी देश बन गया. इसी दौरान, चीन ने उसे अपने अत्याधुनिक जे-10सी फाइटर जेट्स की पेशकश भी कर दी. यह विमान तकनीकी रूप से काफी उन्नत माना जाता है और इसे अक्सर भारत के राफेल जेट के समकक्ष खड़ा किया जाता है.

कूटनीतिक तनावों का असर

डोनाल्ड ट्रंप और कोलंबिया के बीच बीते कुछ समय में हुए कूटनीतिक विवाद ने इस समीकरण को और बिगाड़ दिया. जब ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों को कोलंबिया वापस भेजने की योजना बनाई, तो कोलंबियाई राष्ट्रपति ने अमेरिकी सैन्य विमानों के प्रवेश पर रोक लगा दी. इसके जवाब में ट्रंप ने कोलंबियाई उत्पादों पर 25% टैरिफ लगा दिया. इस घटना ने दोनों देशों के संबंधों में गहरी दरार डाल दी, और चीन ने इसी मौके का फायदा उठाकर कोलंबिया के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा लीं.

चीन बनाम स्वीडन: कोलंबिया के लिए कठिन फैसला

कोलंबिया के सामने अब एक बड़ा फैसला है: क्या वह चीन से 24 जे-10सी लड़ाकू विमान खरीदेगा, या फिर स्वीडन से ग्रिपेन-ई फाइटर जेट्स का ऑर्डर बरकरार रखेगा? गौर करने वाली बात ये है कि ग्रिपेन-ई में अमेरिकी इंजन है, और अगर अमेरिका से कोलंबिया के संबंध और बिगड़ते हैं, तो अमेरिका इस सौदे को रोक भी सकता है. वहीं चीन बिना किसी शर्त के अपने जेट्स देने को तैयार है. यही नहीं, उसने यह वादा भी किया है कि जे-10सी को अपनाकर कोलंबिया "सैन्य आत्मनिर्भरता" की दिशा में एक मजबूत कदम उठाएगा.

अमेरिका के लिए चेतावनी की घंटी

अगर कोलंबिया चीन से यह डील फाइनल करता है, तो यह अमेरिका के लिए सिर्फ एक राजनयिक झटका नहीं होगा, बल्कि यह लैटिन अमेरिका में एक रणनीतिक बदलाव की शुरुआत मानी जाएगी. इस डील के जरिए चीन उस इलाके में अपनी सैन्य और राजनीतिक पकड़ को मजबूत करेगा, जिसे अमेरिका पारंपरिक रूप से अपना प्रभाव क्षेत्र मानता आया है.

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