तेहरान: मध्य पूर्व में जारी हालिया संघर्ष के दौरान ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम के मोर्चे पर एक गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ा है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने युद्धविराम लागू होने से ठीक पहले ईरान के एक शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक मोहम्मद रजा सदीघी को निशाना बनाकर मार गिराया. यह वही वैज्ञानिक थे, जिन पर ईरान के संभावित परमाणु हथियार के "विस्फोटक कोर" विकसित करने की अहम जिम्मेदारी थी.
हमले की टाइमिंग: युद्धविराम से तीन घंटे पहले
सदीघी को 23 जून की सुबह लगभग 1:07 बजे निशाना बनाया गया. यह हमला युद्धविराम के लागू होने से महज कुछ घंटे पहले गिलान प्रांत के अस्तानेह अशरफीह शहर में किया गया था.
रिपोर्ट बताती है कि सदीघी को पहले दिन यानी 13 जून को भी निशाना बनाया गया था, लेकिन तब वे बच निकलने में सफल रहे थे. दुर्भाग्य से उस हमले में उनका 17 साल का बेटा मारा गया था.
अंत में, युद्ध के आखिरी घंटे में तीन मिसाइलों ने उनके पूरे परिवार को तबाह कर दिया—सदीघी, उनकी पत्नी, बच्चे और अन्य रिश्तेदारों समेत कुल 15 लोगों की मौत हुई.
वैज्ञानिक की पहचान थी गोपनीय
सदीघी को सार्वजनिक रूप से एक रिसर्च वैज्ञानिक और कोविड-19 वैक्सीन प्रोजेक्ट से जुड़ा बताया गया था. लेकिन वास्तव में वे ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े हुए थे. रिपोर्टों के अनुसार, उनकी भूमिका इतनी गोपनीय थी कि उनके परिवार को भी असलियत का अंदाज़ा नहीं था.
शोधकर्ता के तौर पर छवि, लेकिन काम था सैन्य
न्यूक्लियर तकनीक से जुड़ी कई स्टडीज़ प्रकाशित
रजा सदीघी ईरान के गुप्त परमाणु परियोजना का वह चेहरा थे, जो पर्दे के पीछे से विस्फोटक प्रणाली के विकास में लगे हुए थे. उन्होंने ईरानी वैज्ञानिक पत्रिकाओं में विस्फोटकों और न्यूक्लियर तकनीक से जुड़ी कई स्टडीज़ प्रकाशित की थीं.
इसका मतलब साफ है: वे सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं, बल्कि उस तकनीक के मुख्य निर्माता थे जो किसी भी परमाणु हथियार के 'कोर' को संभव बनाती है.
सिर्फ ठिकानों पर नहीं, टारगेटेड किलिंग भी
13 जून को युद्ध की शुरुआत के दिन इजरायल ने 9 अन्य ईरानी वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को भी निशाना बनाया था. रजा सदीघी पहले हमले में बच गए, लेकिन इजरायल ने उन्हें ज़िंदा नहीं छोड़ा.
यह एक स्पष्ट संकेत है कि इजरायल सिर्फ ईरान की परमाणु साइट्स को खत्म करने तक सीमित नहीं है—बल्कि वह उन लोगों को भी खत्म कर रहा है जो इस तकनीक को आगे बढ़ा सकते हैं.
ईरान की 'परमाणु महत्वाकांक्षाओं' पर गहरा असर
सदीघी की मौत न सिर्फ एक इंसान की हत्या है, बल्कि ईरान के दशकों पुराने परमाणु बम के सपने को भी गहरा झटका है. जिस वैज्ञानिक को इस प्रोजेक्ट की रीढ़ माना जा रहा था, उसकी मृत्यु के साथ तकनीकी निरंतरता, अनुसंधान और योजनाओं में बड़ी रुकावट आना तय है.
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