ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर उस स्तर पर पहुंच गया है, जहां कूटनीति की संभावनाएं तभी दिख रही हैं जब ठोस गारंटी दी जाए. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने फ्रांसीसी समाचार पत्र ले मोंदे से बातचीत में स्पष्ट किया कि तेहरान वाशिंगटन से केवल उसी स्थिति में बातचीत करेगा, जब उसे पक्की आश्वस्ति दी जाएगी कि अमेरिका दोबारा उस पर सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा.
अरागची ने यह भी कहा कि ईरान पर हाल में हुए अमेरिकी हमलों से जो नुकसान पहुंचा है, खासकर उसके परमाणु प्रतिष्ठानों को, उसके लिए मुआवजा मिलना चाहिए. उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लक्ष्य बनाकर जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया.
'डिप्लोमेसी के लिए रास्ता खुला है, लेकिन भरोसे के साथ'
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कूटनीति के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा, “डिप्लोमेसी एक दो-तरफा प्रक्रिया है. अमेरिका को अपने आक्रामक रवैये की जिम्मेदारी लेनी होगी. खासकर उन हमलों की, जो उसने हाल में ईरान के परमाणु केंद्रों पर किए हैं.” अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा किए गए दावे कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमलों में पूरी तरह तबाह हो गया है, उसे भी अरागची ने खारिज किया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी का हवाला देते हुए कहा कि कार्यक्रम केवल कुछ महीनों के लिए पीछे गया है, लेकिन नष्ट नहीं हुआ.
‘हम अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेंगे’
अरागची ने कहा, “हमारे शांतिपूर्ण परमाणु स्थलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है. इसकी समीक्षा अभी जारी है. लेकिन इससे हमारे अधिकार खत्म नहीं होते. हमें मुआवजा मांगने का पूरा हक है.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान की परमाणु गतिविधियां पूरी तरह IAEA की निगरानी में संचालित हो रही हैं और किसी भी तरह से अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा रहा.
परमाणु कार्यक्रम नहीं होगा बंद
इस बातचीत में अरागची ने इस संभावना को भी पूरी तरह नकार दिया कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम छोड़ देगा. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कार्यक्रम केवल हथियारों के लिए नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा, चिकित्सा और कृषि संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए है. उन्होंने कहा, “हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत और वर्षों की शोध को बमबारी से खत्म नहीं किया जा सकता. यह कार्यक्रम हमारी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.”
तनाव की स्थिति कायम, लेकिन बातचीत की डोर अब भी जुड़ी हुई
ईरान के इस रुख से यह साफ है कि वह अपनी शर्तों पर ही आगे बढ़ेगा. अमेरिका को यदि कूटनीति की राह चुननी है, तो उसे पहले भरोसा जीतना होगा. ईरान न केवल जवाबदेही चाहता है, बल्कि अतीत की कार्रवाई के लिए मुआवजा भी. ऐसे में आने वाले हफ्ते इस बात को तय करेंगे कि दोनों देशों के बीच वार्ता की कोई ठोस जमीन बनती है या नहीं.
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