West Asia Tensions: मिडिल ईस्ट में जारी राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सुर्खियों में आ गया. ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान ने युद्धविराम की अपील की है, लेकिन ईरान ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे 'आधारहीन और झूठा' करार दिया है, और अब दोनों देशों के बीच रिश्तों में और भी तल्खी देखने को मिल सकती है.
ट्रंप के दावे को खारिज किया गया
ट्रंप के इस दावे के बाद, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक टेलीविजन पर बयान जारी किया और कहा कि ट्रंप का यह दावा बिलकुल गलत है और इसके साथ वास्तविकता का कोई संबंध नहीं है. ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रंप जैसे दावे 'अप्रैल फूल' के मजाक जैसा हैं, क्योंकि किसी देश के राष्ट्रपति का चुनाव सोशल मीडिया पोस्ट से नहीं होता. इसके साथ ही, ईरान ने इस बयान को पूरी तरह से राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और इसका खंडन किया.
"ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ"
ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ है और नई सरकार ने युद्धविराम के लिए उनसे संपर्क किया है. इस पर ईरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी. मुंबई स्थित ईरान के कांसुलेट जनरल ने स्पष्ट किया कि ईरान में कोई सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है और मसीद पेझेश्कियन पहले भी राष्ट्रपति थे और अब भी वही पद पर हैं. इससे साफ है कि ट्रंप का दावा पूरी तरह से झूठा था.
"अमेरिकी मदद से युद्ध हो सकता है खत्म"
वहीं, ट्रंप ने यह भी कहा था कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाए, तो अमेरिका इस प्रस्ताव पर विचार कर सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की परमाणु क्षमता अब कमजोर हो चुकी है और अब वह परमाणु शक्ति बनने की स्थिति में नहीं है. हालांकि, इस बात को लेकर भी ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि यह युद्ध कब समाप्त होगा, इसका कोई निश्चित समय नहीं है.
ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों की प्रतिक्रिया
जब ट्रंप ने यह बयान दिया, तो संयुक्त राज्य अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने इस युद्ध में शामिल होने से मना कर दिया. इनमें यूनाइटेड किंगडम, स्पेन और फ्रांस जैसे देश शामिल हैं. इस पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जो देश तेल संकट का सामना कर रहे हैं, वे अमेरिका से तेल खरीदें या फिर खुद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल लेकर आएं.
अब्बास अरागची का बयान
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक इंटरव्यू में यह साफ संकेत दिया कि ईरान पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार है. उनका कहना था कि किसी भी देश को ईरान की जनता को धमकाने के लहजे में बात नहीं करनी चाहिए. यह बयान ईरान की ओर से अमेरिका को एक स्पष्ट संदेश था कि वह किसी भी तरह से दबाव में नहीं आएगा.
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