नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया इजरायल दौरे और उसके बाद ईरान पर हुए हमले को लेकर उठे सवालों पर अब भारतीय सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि ईरान पर हमले से संबंधित किसी भी कार्रवाई की पूर्व जानकारी भारत सरकार को नहीं थी. यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस हमले के बाद कई सवाल उठने लगे थे, खासकर भारत की भूमिका और जानकारी के संदर्भ में. आइए, इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से नजर डालते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी का इजरायल दौरा और अहम समझौते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 और 26 फरवरी 2026 को इजरायल का दो दिवसीय दौरा किया, जो उनके मित्र देश इजरायल का दूसरा ऐतिहासिक दौरा था. इससे पहले जुलाई 2017 में पीएम मोदी ने इजरायल का पहला आधिकारिक दौरा किया था. इस बार के दौरे में भारत और इजरायल के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए. दोनों देशों के बीच एआई, साइबर सुरक्षा, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में कुल 16 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेंगे.
ईरान पर इजरायल और अमेरिका का हमला और भारत की स्थिति
प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे के कुछ समय बाद, 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया. इस हमले के बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या भारत को इस हमले की पूर्व जानकारी थी, खासकर क्योंकि पीएम मोदी का इजरायल दौरा और यह हमला दोनों एक समय के भीतर हुए थे.
भारत सरकार की तरफ से अब यह स्पष्ट किया गया है कि इस हमले के बारे में भारत को कोई पूर्व जानकारी नहीं थी. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस पर कहा कि इजरायल ने भारत के साथ इस हमले पर कोई पूर्व चर्चा नहीं की थी और भारत सरकार को इसकी जानकारी बाद में मिली. यह बयान भारत सरकार की तरफ से पहली बार ईरान युद्ध और इसके संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास है.
ईरान पर हमले के बाद वैश्विक प्रतिक्रियाएं
ईरान पर हुए हमले के बाद वहां भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की परमाणु क्षमता अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और आने वाले कुछ दिनों में युद्ध खत्म हो सकता है. ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान की ओर से सीजफायर की अपील की गई है. हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वह किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा. इसके साथ ही, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद करने की धमकी दी, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा गया है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है.
अमेरिका के सहयोगियों से समर्थन की कमी
इस युद्ध में अमेरिका को अपने नाटो सहयोगियों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है. यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, और स्पेन जैसे देशों ने इजरायल और अमेरिका का खुलकर समर्थन करने से इंकार कर दिया है. इस पर ट्रंप ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर सकते हैं, जिससे वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर अनिश्चितता का एक और दौर शुरू हो सकता है.
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