Raghav Chadha: आम आदमी पार्टी के भीतर एक बार फिर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आते दिख रहे हैं. राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. इस फैसले के बाद चड्ढा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें खामोश जरूर किया गया है, लेकिन वे पराजित नहीं हुए हैं.
सोशल मीडिया पर दिया तीखा संदेश
शुक्रवार को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, “मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं. यह मेरा आम आदमी के नाम संदेश है.”
Silenced, not defeated
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 3, 2026
My message to the ‘aam aadmi’
—
खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ
'आम आदमी’ को मेरे संदेश pic.twitter.com/poUwxsu0S3
उन्होंने अपने वीडियो में यह भी कहा कि संसद में उन्होंने हमेशा ऐसे मुद्दे उठाए, जिन पर आमतौर पर चर्चा नहीं होती. उनके मुताबिक, अगर आम जनता से जुड़े सवाल उठाना गलत माना जा रहा है, तो यह चिंताजनक है.
पहले भी उठाए थे आम लोगों से जुड़े मुद्दे
इससे एक दिन पहले भी चड्ढा ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने संसद में उठाए गए मुद्दों का जिक्र किया. इनमें मध्यम वर्ग पर बढ़ता टैक्स बोझ, मोबाइल डेटा की समय सीमा खत्म होने की समस्या, पितृत्व अवकाश की मांग और एयरपोर्ट पर अतिरिक्त सामान के शुल्क जैसे विषय शामिल थे.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 2, 2026
उन्होंने संकेत दिया कि उनका फोकस हमेशा आम लोगों की परेशानियों को सामने लाने पर रहा है.
AAP का फैसला और नया नाम सामने
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने का अनुरोध किया. उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया गया है.
सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने यह भी कहा है कि संसद में बोलने के लिए तय कोटे से चड्ढा को समय न दिया जाए. इस फैसले को पार्टी के अंदर बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
केजरीवाल से करीबी, फिर दूरी की चर्चा
राघव चड्ढा को लंबे समय तक अरविंद केजरीवाल के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है. पार्टी के विस्तार और रणनीति में उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी, खासकर दिल्ली और पंजाब में.
हालांकि, हाल के महीनों में उनकी चुप्पी और कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी ने अटकलों को जन्म दिया. उपनेता पद से हटाने का फैसला इन्हीं चर्चाओं के बीच आया है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के अंदर समीकरण बदल रहे हैं.
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