मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है. इजराइल और अमेरिका के लगातार हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है और अब उसने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों की ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
गुरुवार को यूएई ने अबू धाबी स्थित हबशान गैस फैसिलिटी और बाब फील्ड पर हुए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की. इन हमलों के बाद वहां गैस उत्पादन रोकना पड़ा. इससे पहले ईरान कतर की गैस सुविधाओं पर भी हमला कर चुका है. ये घटनाएं तब हुईं जब इजराइल ने फारस की खाड़ी में ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड को निशाना बनाया था.
ऊर्जा सेक्टर पर बढ़ता खतरा
इस संघर्ष में अब सबसे ज्यादा खतरा तेल और गैस से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिख रहा है. इजराइल ने ईरान के एक ऑफशोर गैस फील्ड पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने कतर और अन्य खाड़ी देशों की ऊर्जा सुविधाओं पर पलटवार किया.
ईरान ने इन हमलों की निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि हालात बेकाबू हो सकते हैं और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
बड़े नेताओं की मौत से बढ़ा तनाव
इजराइल ने अपने अभियान के तहत ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को मार गिराया. इसके अलावा ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े जनरल गुलाम रेजा सुलेमानी भी मारे गए.
इन घटनाओं के बाद ईरान ने इजराइल पर कई मिसाइल हमले किए. वेस्ट बैंक में एक मिसाइल गिरने से नुकसान हुआ और कुछ लोगों की मौत भी हुई.
तेल की कीमतों में उछाल
जंग का असर अब वैश्विक बाजार पर भी दिखने लगा है.
इसका असर पेट्रोल और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों पर भी पड़ रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ी चिंता
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. यह दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती है.
ईरान ने कहा है कि यह रास्ता खुला है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नहीं. इससे वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर खतरा बढ़ गया है.
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