ईरान युद्ध ने खाली किया US का हथियार भंडार, पेंटागन ने डिफेंस कंपनियों को दिया बड़ा आदेश

US Arms Shortage: ईरान के साथ लंबे चले सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका के सामने अपने हथियारों का स्टॉक दोबारा भरने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. इसी को देखते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने देश की बड़ी डिफेंस कंपनियों से हथियारों का उत्पादन और उनकी डिलीवरी तेज करने को कहा है.

Iran conflict depletes US weapons stockpiles Pentagon places major order with defense companies
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

US Arms Shortage: ईरान के साथ लंबे चले सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिका के सामने अपने हथियारों का स्टॉक दोबारा भरने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. इसी को देखते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने देश की बड़ी डिफेंस कंपनियों से हथियारों का उत्पादन और उनकी डिलीवरी तेज करने को कहा है.

द वॉशिंगटन पोस्ट के हाथ लगे एक मेमो के मुताबिक, अमेरिकी उप रक्षा मंत्री स्टीव फीनबर्ग ने डिफेंस कंपनियों को पत्र भेजकर अहम हथियार प्रणालियों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और डिलीवरी में लगने वाला समय कम करने के लिए कहा है. कंपनियों को इसके लिए 21 दिनों के अंदर अपनी योजना देने को कहा गया है.

पेंटागन ने कंपनियों से क्या कहा?

फीनबर्ग ने अपने पत्र में साफ किया कि अब हथियारों के विकास और उत्पादन में कई साल लगने वाला पुराना तरीका स्वीकार नहीं किया जा सकता. पेंटागन चाहता है कि कंपनियां मौजूदा उत्पादन व्यवस्था में तेजी लाएं और जहां जरूरत हो, वहां उत्पादन क्षमता बढ़ाएं.

पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने भी मेमो की पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि रक्षा विभाग हथियारों की खरीद और डिलीवरी को तेज करने पर काम कर रहा है, ताकि सैनिकों को जरूरत के मुताबिक जल्द हथियार उपलब्ध कराए जा सकें.

अमेरिका का कहना है कि यह कदम सिर्फ ईरान के साथ हुए हालिया संघर्ष की वजह से नहीं उठाया गया है. इसका एक बड़ा मकसद अमेरिकी रक्षा उद्योग की उत्पादन क्षमता को लंबे समय के लिए मजबूत करना भी है.

क्या अमेरिका के हथियार खत्म हो गए हैं?

अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया है कि सेना के पास मौजूदा अभियान के लिए हथियारों की कमी हो गई है. डिफेंस इनोवेशन यूनिट के अधिकारी जैरेड कॉनली ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास अभी अपने मौजूदा सैन्य अभियान को जारी रखने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद मौजूद है.

लेकिन असली चिंता भविष्य को लेकर है. अमेरिका ने संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में आधुनिक मिसाइलों और इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया है. इन हथियारों को दोबारा बनाने में कई साल लग सकते हैं. यानी अमेरिका के पास आज की लड़ाई के लिए पर्याप्त हथियार हो सकते हैं, लेकिन अगर जल्द ही कोई दूसरा बड़ा संघर्ष शुरू होता है तो मौजूदा स्टॉक चिंता का कारण बन सकता है.

थाड मिसाइलों का स्टॉक काफी घटा

अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चिंता एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर है. इनमें टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस यानी थाड बेहद अहम है. थाड का इस्तेमाल दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले हवा में रोकने के लिए किया जाता है.

सीएसआईएस के अनुमान के मुताबिक, ईरान के साथ युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 452 थाड इंटरसेप्टर थे. अप्रैल में युद्धविराम के समय यह संख्या घटकर करीब 232 से 262 रह गई थी. इसके बाद कुछ इंटरसेप्टर की भरपाई की गई, लेकिन अनुमान के मुताबिक अमेरिका के पास अभी भी करीब 234 से 278 थाड इंटरसेप्टर ही हैं.

इसका मतलब है कि थाड का स्टॉक युद्ध से पहले के मुकाबले काफी कम है. हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग बताई गई है क्योंकि अमेरिका अपने वास्तविक हथियार स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक नहीं करता.

पैट्रियट मिसाइलों पर भी बड़ा दबाव

अमेरिकी मिसाइल डिफेंस नेटवर्क में पैट्रियट सिस्टम भी बेहद महत्वपूर्ण है. इसका इस्तेमाल मिसाइल और दूसरे हवाई खतरों को रोकने के लिए किया जाता है. सीएसआईएस के अनुमान के मुताबिक, युद्ध से पहले अमेरिका के पास करीब 2,330 पैट्रियट इंटरसेप्टर थे. अप्रैल के युद्धविराम तक इनकी संख्या करीब 1,030 रह गई थी. इसके बाद भी लड़ाई में इनके इस्तेमाल से स्टॉक और घटा. 

अनुमान के अनुसार अब अमेरिका के पास करीब 759 से 827 पैट्रियट इंटरसेप्टर हो सकते हैं. पैट्रियट सिस्टम की मांग इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि सिर्फ अमेरिकी सेना ही इन पर निर्भर नहीं है. यूक्रेन और मध्य पूर्व के कई अमेरिकी सहयोगी भी इन प्रणालियों का इस्तेमाल करते हैं.इस वजह से अमेरिका को अपने हथियारों की जरूरत और सहयोगी देशों की मांग, दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है.

टॉमहॉक मिसाइलों का स्टॉक भी प्रभावित

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई के दौरान केवल एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया. लंबी दूरी तक हमला करने वाली मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ. इनमें टॉमहॉक क्रूज मिसाइल खास तौर पर महत्वपूर्ण है. इसे अमेरिकी युद्धपोतों और पनडुब्बियों से दागा जा सकता है. सीएसआईएस के अनुमान के मुताबिक, संघर्ष के दौरान अमेरिका ने 1,000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें इस्तेमाल कीं.

समस्या यह है कि इन मिसाइलों का उत्पादन काफी तेजी से नहीं होता. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2015 से 2026 के बीच अमेरिका ने हर साल औसतन करीब 86 टॉमहॉक मिसाइलें खरीदीं. ऐसे में युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुई बड़ी संख्या में मिसाइलों को दोबारा बनाना आसान नहीं होगा. मौजूदा उत्पादन रफ्तार के हिसाब से अमेरिकी टॉमहॉक स्टॉक को युद्ध से पहले के स्तर तक पहुंचने में 2030 के आखिर तक का समय लग सकता है.

डिफेंस कंपनियां तुरंत उत्पादन क्यों नहीं बढ़ा सकतीं?

आधुनिक मिसाइल बनाना सामान्य सामान बनाने जैसा आसान काम नहीं है. इसके लिए बेहद खास पुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक्स, रॉकेट मोटर, सेंसर और दूसरी तकनीक की जरूरत होती है. कई बार किसी एक छोटे पुर्जे के लिए भी कुछ ही कंपनियां सप्लाई करती हैं. इसलिए अगर पेंटागन किसी हथियार का ऑर्डर अचानक बढ़ा देता है तो कंपनी अगले दिन से उसका उत्पादन कई गुना नहीं कर सकती. उत्पादन बढ़ाने के लिए नई मशीनें लगानी पड़ सकती हैं. 

नई उत्पादन लाइन शुरू करनी पड़ सकती है. कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी पड़ती है और उन्हें ट्रेनिंग देनी पड़ती है. इसके अलावा नए सप्लायर भी खोजने पड़ सकते हैं. कई मामलों में इसके लिए अमेरिकी संसद से अतिरिक्त फंडिंग की मंजूरी भी जरूरी होती है. यही वजह है कि किसी हथियार की जरूरत महसूस होने और उसके सेना तक पहुंचने के बीच कई साल का अंतर हो सकता है.

पैट्रियट और थाड का उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

पेंटागन पहले ही बड़ी डिफेंस कंपनियों के साथ उत्पादन बढ़ाने के लिए समझौते कर चुका है. लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्रॉप ग्रुमन के साथ 3 अरब डॉलर से ज्यादा के समझौते किए गए हैं. इनका मकसद पैट्रियट और थाड सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पुर्जों का उत्पादन बढ़ाना है. अमेरिका का लक्ष्य पैट्रियट की उत्पादन क्षमता को करीब तीन गुना और थाड की उत्पादन क्षमता को करीब चार गुना करने का है.

इसके अलावा पैट्रियट पीएसी-3 मिसाइल के रॉकेट मोटर के लिए एक और सप्लायर जोड़ने की योजना है. इससे किसी एक कंपनी या सप्लायर पर ज्यादा निर्भरता कम होगी और उत्पादन में रुकावट की संभावना घटेगी.

हथियारों का स्टॉक कब तक दोबारा भर पाएगा अमेरिका?

अलग-अलग हथियारों के स्टॉक को दोबारा भरने में अलग-अलग समय लग सकता है. थाड इंटरसेप्टर के मामले में इस्तेमाल किए गए हथियारों की भरपाई 2029 के आखिर तक होने का अनुमान है. पैट्रियट इंटरसेप्टर के लिए भी करीब 2029 के मध्य तक का समय लग सकता है.टॉमहॉक मिसाइलों की स्थिति और मुश्किल है. मौजूदा उत्पादन रफ्तार को देखते हुए इनका स्टॉक 2030 के आखिर तक भी युद्ध से पहले के स्तर पर नहीं पहुंच सकता. 

एसएम-3 और एसएम-6 जैसी मिसाइलों के उत्पादन में भी कई साल लग सकते हैं. वहीं जेएएसएसएम जैसे कुछ हथियारों का स्टॉक अपेक्षाकृत तेजी से दोबारा बनाया जा सकता है. प्रिसिजन स्ट्राइक मिसाइल यानी पीआरएसएम भी नया हथियार है और युद्ध से पहले इसका स्टॉक कम था. इसलिए इसके मामले में स्थिति अलग है.

अमेरिका को चीन की भी चिंता

पेंटागन की यह चिंता सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है. अमेरिका लंबे समय से चीन के साथ संभावित सैन्य टकराव को लेकर भी तैयारी कर रहा है. खासकर ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव की स्थिति में बड़ी संख्या में मिसाइलों और दूसरे आधुनिक हथियारों की जरूरत पड़ सकती है.

मध्य पूर्व में लंबे सैन्य अभियान ने अमेरिका को यह दिखा दिया है कि आधुनिक युद्ध में मिसाइलों और एयर डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल कितनी तेजी से हो सकता है. अगर अमेरिका के हथियारों का स्टॉक कई साल तक कम रहता है तो उसे एक साथ कई मोर्चों पर मुश्किल हो सकती है. उसे मध्य पूर्व, यूरोप और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य जिम्मेदारियां संभालनी पड़ सकती हैं.

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