रियाद: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अल जुबैल इलाके में सऊदी अरामको के बेरी गैस प्लांट को निशाना बनाया है. यह सऊदी अरब की बड़ी गैस प्रोसेसिंग सुविधाओं में से एक है. नासा की सैटेलाइट तस्वीरों में यहां आग लगी दिखाई दी है. करीब दो हफ्तों में सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर यह पहला बड़ा हमला बताया जा रहा है.
जुबैल दुनिया के बड़े पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में शामिल है. यहां से दुनिया की पेट्रोकेमिकल सप्लाई का करीब 6 से 8 फीसदी हिस्सा आता है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था में भी इसका बड़ा योगदान है. यहां सऊदी अरामको के अलावा कई बड़ी कंपनियां काम करती हैं.
BREAKING: The Mecca Treaty did not save Saudi Arabia today. Turkey and Pakistan were nowhere to be seen this morning as the Houthis turned part of the kingdom’s energy infrastructure into a scene of fire and destruction in Jubail.
— Babak Taghvaee - The Crisis Watch (@BabakTaghvaee1) August 9, 2026
The Houthis in Yemen struck Saudi Aramco’s Berri… pic.twitter.com/RWADdYvfg8
इस हमले के बाद सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए नए रक्षा समझौते की भी चर्चा शुरू हो गई है. दोनों घटनाओं के बीच सिर्फ दो दिन का अंतर है.
हूतियों के हमले के बाद कई जगह आग
नासा के एफआईआरएमएस सैटेलाइट डेटा में जुबैल के पास बेरी गैस प्लांट में करीब 125 मेगावाट की फायर रेडिएटिव पावर दर्ज की गई है. इससे वहां लगी आग की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा रहा है. इससे पहले अप्रैल में भी ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों में इस प्लांट को निशाना बनाया गया था.
इसके अलावा सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने जाजान में सऊदी अरामको की एक सुविधा में आग लगने की जानकारी दी है. जाजान लाल सागर के किनारे यमन के पास स्थित है. यहां अरामको की रिफाइनरी भी है और वहां भी आग लगने की खबर सामने आई है.
सैटेलाइट तस्वीरों और सऊदी अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक, जुबैल के बेरी गैस प्लांट और जाजान की अरामको सुविधा में अलग-अलग घटनाएं हुईं. हालांकि, दोनों जगह आग लगने की सही वजह और नुकसान का पूरा पता अभी नहीं चल पाया है. अब तक किसी संगठन ने इन घटनाओं की जिम्मेदारी भी नहीं ली है.
सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की रक्षा समझौता
हूती हमले सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच ‘मक्का समझौते’ पर हस्ताक्षर होने के ठीक दो दिन बाद हुए हैं. यह एक संयुक्त रक्षा समझौता है, जिसका मकसद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना है.
इस समझौते पर जेद्दा में हस्ताक्षर हुए हैं. इसमें सामूहिक रक्षा का प्रावधान भी शामिल है. ईरान ने इस समझौते को सिर्फ ‘कागजी समझौता’ बताया है और कहा है कि इससे सऊदी अरब को वास्तविक सुरक्षा नहीं मिलेगी.
वहीं, तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा है कि यह समझौता नाटो के आर्टिकल-5 के काफी करीब है. इसके तहत एक सदस्य देश पर हमला होने पर उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाता है.
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